ed raid on ipac chief pratik jain kolkata : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव का कुरुक्षेत्र बन गई है। गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पीएसी (I-PAC) के प्रमुख प्रतीक जैन के आवास सहित 15 विभिन्न ठिकानों पर की गई छापेमारी ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। इस कार्रवाई की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाते हुए न केवल मौके पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, बल्कि केंद्र सरकार पर 'राजनीतिक प्रतिशोध' और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के हनन का गंभीर आरोप मढ़ दिया। घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब ईडी की टीमों ने फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले की जांच के सिलसिले में सुबह-सुबह छापेमारी शुरू की, लेकिन जल्द ही यह प्रशासनिक कार्रवाई एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गई।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस अभियान को सीधे तौर पर आगामी चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने की साजिश करार दिया। साल्ट लेक स्थित आई-पीएसी कार्यालय का दौरा करने के बाद उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका पर कड़े प्रहार किए। बनर्जी ने आरोप लगाया कि जांच की आड़ में उनकी पार्टी के गोपनीय दस्तावेज, हार्ड डिस्क और उम्मीदवारों की सूचियां ज़ब्त की जा रही हैं। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए सवाल किया कि क्या राजनीतिक दलों के डेटा चुराना देश के गृह मंत्री का संवैधानिक कर्तव्य है। मुख्यमंत्री ने इसे एक गहरी साजिश बताते हुए दावा किया कि एक ओर राज्य में मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया चल रही है, तो दूसरी ओर एजेंसी के जरिए उनकी पार्टी की रणनीतिक जानकारी इकट्ठा की जा रही है। उन्होंने भाजपा को बाहुबल के बजाय राजनीतिक मैदान में सीधी चुनौती स्वीकार करने की ललकार दी।



दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे प्रकरण को मुख्यमंत्री द्वारा जांच में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप करार दिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की प्रतीक जैन के आवास पर उपस्थिति को 'असंवैधानिक' और 'अनैतिक' बताया। अधिकारी ने मुख्यमंत्री और कोलकाता पुलिस आयुक्त की मौके पर मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए ईडी से इस हस्तक्षेप के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने पुरानी घटनाओं का स्मरण कराते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस लगातार केंद्रीय जांच एजेंसियों के कार्य में बाधा डालने का प्रयास करती रही है।

कानूनी परिप्रेक्ष्य में, प्रवर्तन निदेशालय का दावा है कि यह छापेमारी उस संगठित गिरोह की जड़ों तक पहुंचने के लिए की गई है जो लोगों को फर्जी सरकारी नौकरियों का झांसा देकर ठग रहा था। अधिकारियों के अनुसार, यह तलाशी अभियान भ्रष्टाचार के ठोस इनपुट पर आधारित है। हालांकि, जिस तरह से एक आपराधिक जांच के केंद्र में राजनीतिक दलों के आईटी प्रमुख और रणनीतिकार आ गए हैं, उसने इस कार्रवाई के पीछे के मंतव्य पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। यह घटनाक्रम न केवल केंद्र-राज्य संबंधों में बढ़ती कड़वाहट को दर्शाता है, बल्कि आने वाले दिनों में बंगाल की चुनावी राजनीति में और अधिक आक्रामकता और कानूनी दांव-पेंचों के संकेत दे रहा है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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