भारत निर्वाचन आयोग ने मतगणना केंद्रों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए QR कोड आधारित ईपीआईसी प्रणाली लागू की है। यह व्यवस्था पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी सहित कई राज्यों में लागू होगी। तीन-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली के तहत केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश मिलेगा।

भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने मतदाता पहचान और चुनावी प्रक्रियाओं को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नया क्यूआर कोड सक्षम इलेक्टर्स फोटो आइडेंटिटी कार्ड (EPIC) सिस्टम लागू किया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य मतदाता सत्यापन को तेज, डिजिटल और अधिक सुरक्षित बनाना तथा फर्जीवाड़े की संभावनाओं को न्यूनतम करना है। यह कदम आयोग की उस व्यापक पहल का हिस्सा है, जिसके तहत चुनावी सेवाओं के डिजिटलीकरण और पहचान प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से सुदृढ़ किया जा रहा है।

चुनाव आयोग के अनुसार, इस प्रणाली को सबसे पहले पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की मतगणना के दिन लागू किया जाएगा। इसके साथ ही पांच राज्यों की सात विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों में भी इसका उपयोग किया जाएगा। बाद में इसे देशभर में होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतगणना केंद्रों पर अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को रोकने के लिए यह कदम अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से QR कोड आधारित फोटो पहचान पत्र प्रणाली के साथ एक त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई है, जो मतगणना केंद्रों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाएगी। चुनाव आयोग ने सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को इस नई व्यवस्था के सख्त अनुपालन के निर्देश दिए हैं। उन्हें यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सभी निर्धारित चेकपॉइंट्स पर प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती हो, ताकि प्रणाली का सुचारु संचालन हो सके।

इस प्रणाली के तहत QR सक्षम पहचान पत्र उन सभी अधिकृत व्यक्तियों को जारी किए जाएंगे जिन्हें मतगणना केंद्रों के भीतर प्रवेश की अनुमति होती है। इनमें रिटर्निंग ऑफिसर, असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर, मतगणना कर्मी, तकनीकी स्टाफ, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट और मतगणना एजेंट शामिल हैं।

मतगणना केंद्रों के प्रवेश द्वारों पर विशेष चेकपॉइंट बनाए जाएंगे, जहां QR कोड को इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्कैन किया जाएगा। यह स्कैनिंग सीधे चुनाव आयोग के सुरक्षित डेटाबेस ईसीनेट से जुड़ी होगी, जिससे तुरंत व्यक्ति की पहचान और अधिकृत स्थिति की पुष्टि हो सकेगी। यदि सभी विवरण मेल खाते हैं तो प्रवेश की अनुमति दी जाएगी, जबकि किसी भी प्रकार की विसंगति पाए जाने पर प्रवेश स्वतः अस्वीकृत हो जाएगा।

इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और राज्य पुलिस द्वारा की जाएगी, जो प्रवेश द्वारों पर भौतिक सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। इनके साथ रिटर्निंग ऑफिसर और असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर की टीमें भी तैनात रहेंगी, जो यह सुनिश्चित करेंगी कि केवल पूर्व-अनुमोदित व्यक्तियों का ही डेटा सिस्टम में दर्ज हो। इसके अतिरिक्त तकनीकी और IT सहायता कर्मी स्कैनिंग उपकरणों और सिस्टम कनेक्टिविटी को सुचारु बनाए रखने के लिए तैनात रहेंगे। चुनाव आयोग ने इस व्यवस्था को एक बहु-स्तरीय सुरक्षा ढांचे के रूप में तैयार किया है, जिसमें बाहरी स्तर पर भौतिक सुरक्षा बल, मध्य स्तर पर दस्तावेजी और सूची आधारित जांच तथा आंतरिक स्तर पर डिजिटल क्यूआर सत्यापन शामिल है।

इस नई व्यवस्था से फर्जी या डुप्लीकेट पहचान पत्रों के उपयोग की संभावना समाप्त होने की उम्मीद है। साथ ही यह प्रणाली प्रत्येक प्रवेश का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार करेगी, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी। चुनाव आयोग का मानना है कि यह पहल मतगणना प्रक्रिया को न केवल सुरक्षित बनाएगी, बल्कि चुनावी प्रबंधन को तकनीकी रूप से अधिक आधुनिक और भरोसेमंद भी बनाएगी।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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