भारत में डेयरी उद्योग और दूध उत्पादन की प्रगति का नाम लेते ही सबसे पहला नाम आता है डॉ. वि.के. प्रेमजी (Dr. Verghese Kurien) का, जिन्हें आम जनता में प्यार से “दूध का पिता” कहा जाता है। डॉ. प्रेमजी का जन्म 1921 में हुआ और उन्होंने जीवनभर भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र में नवाचार और सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त किया। उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व ने भारत को विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बनाने में अहम भूमिका निभाई।

1970 के दशक में भारत में दूध उत्पादन में अचानक बढ़ोतरी नहीं हुई थी; यह एक संगठित प्रयास और दूरदर्शी योजना का परिणाम था। उस समय ग्रामीण किसानों की आय सीमित थी और डेयरी उद्योग असंगठित था। डॉ. प्रेमजी ने सहकारी डेयरी मॉडल (Cooperative Dairy Model) की स्थापना की, जिसके माध्यम से किसानों को सीधे लाभ, उचित मूल्य और तकनीकी सहायता प्रदान की गई। इसी मॉडल ने अमूल ब्रांड (Amul Brand) को जन्म दिया, जिसने भारतीय डेयरी उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाई।

डॉ. प्रेमजी का प्रमुख योगदान सफेद क्रांति (White Revolution) में था। इस क्रांति ने केवल दूध उत्पादन में वृद्धि नहीं की, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पोषण सुरक्षा और किसानों की आमदनी में स्थायित्व भी लाया। सफेद क्रांति के दौरान, डॉ. प्रेमजी ने आधुनिक डेयरी प्रौद्योगिकी, संग्रह और वितरण नेटवर्क को ग्रामीण भारत तक पहुँचाया। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि दूध केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका उचित मूल्य और उपभोग बढ़े।

उनकी दूरदर्शिता ने भारतीय डेयरी उद्योग को आर्थिक स्थिरता, ग्रामीण सशक्तिकरण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के स्तर तक पहुँचाया। सरकार की कई योजनाओं, जैसे राष्ट्रीय डेयरी संवर्द्धन योजना, ने उनके मॉडल को अपनाया और देश में छोटे और मध्यम किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले। डॉ. प्रेमजी का योगदान केवल आर्थिक या औद्योगिक स्तर तक सीमित नहीं था; उन्होंने यह दिखाया कि तकनीकी नवाचार, सहकारी संरचना और रणनीतिक योजना से राष्ट्रीय पोषण सुरक्षा और सामाजिक कल्याण को भी सुदृढ़ किया जा सकता है।

आज, राष्ट्रीय दुग्ध दिवस, अमूल के वैश्विक स्तर पर पहचान और भारत की सफेद क्रांति की सफलता, सभी डॉ. प्रेमजी के अथक प्रयास और दूरदर्शिता की गवाही देते हैं। उनकी विरासत यह संदेश देती है कि सही नेतृत्व और समर्पण के साथ कृषि और डेयरी क्षेत्र न केवल आर्थिक विकास के स्रोत बन सकते हैं, बल्कि सामाजिक और पोषण सुरक्षा के लिए भी आधार तैयार कर सकते हैं।

डॉ. वि.के. प्रेमजी की कहानी हमें यह याद दिलाती है कि भारत की सफेद क्रांति सिर्फ दूध उत्पादन की उपलब्धि नहीं थी, बल्कि यह किसानों के सशक्तिकरण, ग्रामीण समृद्धि और राष्ट्रीय पोषण सुरक्षा का प्रतीक भी है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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