अंबेडकर जयंती 2026: पीएम मोदी और उपराष्ट्रपति ने दी श्रद्धांजलि, देखिए पूरी रिपोर्ट
अंबेडकर जयंती 2026 पर संसद परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित कई नेताओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उनके संविधान निर्माण और सामाजिक न्याय के योगदान को याद किया गया।

डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के महान शिल्पकार डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती के अवसर पर संसद भवन परिसर आज श्रद्धा और सम्मान के भाव से सराबोर नजर आया। देश के शीर्ष नेतृत्व ने एकजुट होकर बाबासाहेब को नमन किया, जिनके विचार आज भी भारत की लोकतांत्रिक आत्मा को दिशा देते हैं।
संसद भवन परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बाबासाहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रियों, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, वर्तमान और पूर्व सांसदों सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपनी श्रद्धा अर्पित की।
इसके पश्चात संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में बाबासाहेब के चित्र पर भी पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस कार्यक्रम में लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस ऐतिहासिक क्षण में भाग लेकर अपने सम्मान को व्यक्त किया।
इस अवसर पर आयोजित ‘नो योर लीडर’ कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि बाबासाहेब का जीवन संघर्ष, साहस और संकल्प का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने बताया कि डॉ. अंबेडकर ने अपने जीवन की हर चुनौती को अवसर में बदला और शिक्षा, समर्पण तथा अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर समाज के वंचित वर्गों के लिए आशा की नई किरण बने।
बिरला ने विशेष रूप से भारतीय संविधान में निहित प्रगतिशील प्रावधानों जैसे समानता का अधिकार और बिना किसी भेदभाव के मतदान का अधिकार का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सिद्धांतों ने न केवल भारत को सशक्त बनाया, बल्कि विश्व की अन्य लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बने। उन्होंने युवाओं को बाबासाहेब के विचारों का सच्चा दूत बताते हुए ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
अपने संदेश में ओम बिरला ने यह भी रेखांकित किया कि डॉ. अंबेडकर ने स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुत्व के मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाया और इन्हें भारतीय संविधान में समाहित कर राष्ट्र को दूरदर्शी दिशा प्रदान की। उन्होंने यह भी कहा कि बाबासाहेब का जीवन यह सिखाता है कि सामाजिक परिवर्तन शिक्षा, जागरूकता और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से संभव है।
बाबासाहेब, जो संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष रहे, ने देश को एक ऐसा संविधान दिया जो आज भी लोकतंत्र की मजबूती और प्रत्येक नागरिक के अधिकारों की रक्षा का आधार बना हुआ है। उनके विचार और संघर्ष आज के भारत में सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में निरंतर मार्गदर्शन कर रहे हैं।
अंबेडकर जयंती के इस अवसर पर संसद परिसर में उमड़ा यह सम्मान केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उस विचारधारा का पुनर्स्मरण था, जिसने भारत को एक न्यायपूर्ण, समतामूलक और सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। बाबासाहेब के आदर्श आज भी देश को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं और भविष्य की राह को आलोकित करते हैं।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
