भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक पहुंच को सुदृढ़ करने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम उठाते हुए, प्रसार भारती के अंतर्गत आने वाले दूरदर्शन ने 7 अप्रैल 2026 को भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। नई दिल्ली स्थित दूरदर्शन भवन में आयोजित इस औपचारिक गरिमामयी समारोह में दूरदर्शन के महानिदेशक श्री के. सतीश नम्बूदिरिपाद और आईसीसीआर की महानिदेशक श्रीमती के. नंदिनी सिंगला ने दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में इस रणनीतिक साझेदारी को आधिकारिक रूप प्रदान किया।

इस साझेदारी का मूल उद्देश्य दूरदर्शन के विशाल टेलीविजन, रेडियो और डिजिटल नेटवर्क की शक्ति का लाभ उठाकर आईसीसीआर द्वारा संकलित श्रेष्ठ सांस्कृतिक विषय-वस्तु और प्रस्तुतियों के प्रसार को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाना है। इस सहयोग के दायरे में विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों, जैसे दूतावासों, वाणिज्य दूतावासों और भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों द्वारा आयोजित होने वाले विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ आईसीसीआर मुख्यालय तथा इसके क्षेत्रीय एवं ज़ोनल कार्यालयों की प्रस्तुतियां भी शामिल होंगी।

सहयोग की रूपरेखा के अनुसार, आईसीसीआर विशिष्ट सांस्कृतिक सामग्री और प्रस्तुतियां प्रदान करेगा, जबकि दूरदर्शन अपनी तकनीकी दक्षता का उपयोग करते हुए टेलीविजन चैनलों, रेडियो नेटवर्क, ओटीटी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया जैसे बहुआयामी माध्यमों से उनका व्यापक कवरेज और प्रसारण सुनिश्चित करेगा। यह व्यवस्था विदेशी मिशनों से प्राप्त रिकॉर्डेड सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रसारण का मार्ग भी प्रशस्त करती है, जिससे भारतीय कला और संस्कृति की अभिव्यक्ति को दुनिया के सुदूर कोनों तक पहुंचाया जा सके।

इस समझौते का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी एवं तकनीकी पक्ष विषय-वस्तु के अधिकारों का स्थायी संयुक्त स्वामित्व है, जिसमें डिजिटल अधिकार भी समाहित हैं। यह प्रावधान दोनों संगठनों को दीर्घकालिक उपयोग हेतु समृद्ध सांस्कृतिक सामग्री के संग्रहण और पुन: प्रसार की शक्ति प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, दर्शकों की सहभागिता बढ़ाने के लिए दूरदर्शन कार्यक्रमों के व्यापक पूर्व-प्रचार और क्रॉस-प्लेटफॉर्म मार्केटिंग की जिम्मेदारी भी निभाएगा। वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु, यह समझौता दूरदर्शन को इस सहयोग से विकसित विषय-वस्तु के माध्यम से राजस्व अर्जन के अवसरों को तलाशने की अनुमति भी देता है।

प्रारंभिक तौर पर तीन वर्षों की अवधि के लिए प्रभावी यह समझौता, आपसी सहमति से भविष्य में विस्तारित किया जा सकेगा। यह रणनीतिक गठबंधन न केवल भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत की दृश्यता को बढ़ाएगा, बल्कि सांस्कृतिक प्रसार के पारंपरिक प्रयासों को आधुनिक मीडिया तकनीक और वैश्विक दर्शकों की बदलती पसंद के अनुरूप ढालने में भी एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।

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