तमिलनाडु की राजनीति में महासंग्राम; जानें DMK विधायक अनीता राधाकृष्णन ने दी मुख्यमंत्री को क्यों दी खुली चुनौती
डीएमके विधायक अनीता राधाकृष्णन ने मुख्यमंत्री विजय की सरकार के 6 महीने में गिरने की भविष्यवाणी की और एमके स्टालिन की वापसी का दावा किया।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय (बाएं) और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (दाएं), जिनके बीच राज्य में राजनीतिक वर्चस्व की जंग तेज हो गई है।
Anitha Radhakrishnan target Joseph Vijay TVK government : तमिलनाडु के राजनीतिक क्षितिज पर कड़वाहट और संघर्ष के बादल गहरा गए हैं। दशकों से चले आ रहे पारंपरिक सत्ता संतुलन के टूटने के बाद अब डीएमके (DMK) ने सत्तारूढ़ तमिलागा वेट्री कज़गम (TVK) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तिरुचेंदूर से डीएमके की वरिष्ठ विधायक अनीता राधाकृष्णन ने रविवार को एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार पर सीधा प्रहार करते हुए सनसनीखेज दावा किया कि यह नई गठबंधन सरकार छह महीने का कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाएगी। राधाकृष्णन ने पूरे आत्मविश्वास के साथ घोषणा की कि पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन बहुत जल्द सत्ता में वापसी करेंगे, जिससे राज्य में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
दक्षिण तमिलनाडु में आयोजित एक पार्टी कार्यक्रम के दौरान राधाकृष्णन का तेवर बेहद आक्रामक नजर आया। उन्होंने न केवल मुख्यमंत्री विजय को निशाने पर लिया, बल्कि टीवीके के दिग्गज नेता आधव अर्जुन को भी खुली चुनौती दे डाली। विल्लीवाक्कम सीट से जीत दर्ज करने वाले अर्जुन को ललकारते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि यदि उनमें साहस है, तो वे विधायक पद से इस्तीफा दें और तिरुचेंदूर के चुनावी अखाड़े में उनके खिलाफ सीधे मुकाबले में उतरें। राधाकृष्णन ने भावुक होते हुए तिरुचेंदूर को अपना गढ़ बताया और कहा कि वे किसी भी विरोधी को धूल चटाने के लिए तैयार हैं। गौरतलब है कि तिरुचेंदूर सीट पिछले 25 वर्षों से राधाकृष्णन के कब्जे में है, जहाँ उन्होंने पहले एआईएडीएमके और फिर डीएमके के बैनर तले अपनी अपराजेय छवि बनाए रखी है।
इस राजनीतिक वाकयुद्ध में राधाकृष्णन ने एमके स्टालिन का बचाव करते हुए मतदाताओं पर भी अपनी भड़ास निकाली। स्टालिन को उनके अपने गढ़ कोलाथुर में मिली हार का जिक्र करते हुए उन्होंने वहां के मतदाताओं को "बेकार" तक कह डाला। उन्होंने तर्क दिया कि स्टालिन ने कोलाथुर को सिंगापुर जैसा आधुनिक शहर बना दिया था, फिर भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। राधाकृष्णन ने पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि स्टालिन को अगले चुनाव में त्रिची से मैदान में उतरना चाहिए और वे ही अगले मुख्यमंत्री होंगे। डीएमके नेता के इन बयानों ने न केवल टीवीके खेमे में हलचल मचा दी है, बल्कि राज्य की जनता के बीच भी तीखी बहस छेड़ दी है।
तमिलनाडु की सत्ता में विजय का उदय किसी चमत्कार से कम नहीं था, जिन्होंने डीएमके और एआईएडीएमके के 62 साल पुराने वर्चस्व को समाप्त कर 108 सीटें जीतीं और कांग्रेस व वामदलों के समर्थन से बहुमत का आंकड़ा पार किया। हालांकि, विश्वास मत के दौरान एआईएडीएमके के विधायकों द्वारा व्हिप का उल्लंघन कर विजय के पक्ष में मतदान करने की घटना ने पहले ही विपक्ष को सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाने का मौका दे दिया था। वर्तमान में, नियुक्तियों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर डीएमके लगातार टीवीके सरकार को घेर रही है। अनीता राधाकृष्णन की हालिया टिप्पणियां इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि आने वाले दिन तमिलनाडु की राजनीति के लिए अत्यंत उतार-चढ़ाव भरे और संघर्षपूर्ण होने वाले हैं, जहाँ हर कदम पर सत्ता की स्थिरता की परीक्षा होगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
