चंबा (हिमाचल प्रदेश): कुत्ते को इंसान का सबसे वफादार साथी कहा जाता है, लेकिन हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में इस कहावत ने एक ऐसा जीवंत रूप लिया जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। भरमौर की बर्फीली पहाड़ियों में एक दुखद हादसे के बीच वफादारी की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली है। दो चचेरे भाई, जो सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाने के उत्साह में मौत के आगोश में चले गए, उनके शवों के पास शून्य से भी नीचे (Sub-zero) तापमान में उनका पालतू कुत्ता चार दिनों तक बिना खाए-पिए डटा रहा।

क्या थी वह मनहूस घड़ी?

घटना 23 जनवरी की है, जब भरमौर क्षेत्र के रहने वाले दो चचेरे भाई—19 वर्षीय विकसित राणा और 13 वर्षीय पीयूष कुमार—भरमाणी माता मंदिर (Bharmani Mata Temple) की ओर ट्रेकिंग के लिए निकले थे। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, दोनों युवक सोशल मीडिया पर वीडियो और रील बनाने के उद्देश्य से ऊंचाई वाले इलाके में गए थे।

मौसम विभाग ने पहले ही भारी बर्फबारी का अलर्ट जारी किया था, लेकिन उत्साह में दोनों युवक आगे बढ़ते गए। अचानक मौसम ने करवट ली और भयानक बर्फीले तूफान (Blizzard) ने उन्हें घेर लिया। भारी बर्फबारी और धुंध के कारण वे रास्ता भटक गए। कड़ाके की ठंड और हाइपोथर्मिया (Hypothermia) की चपेट में आने से दोनों की दुखद मृत्यु हो गई।

वफादारी की वो 96 घंटे की पहरेदारी
जब चार दिन बाद (26-27 जनवरी के आसपास) रेस्क्यू टीम ने हेलिकॉप्टर और ड्रोन की मदद से शवों को खोजा, तो वहां का दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था। 13 वर्षीय पीयूष के शव के पास उसका पालतू पिटबुल (Pitbull) कुत्ता बैठा था।

  • बर्फीला तप: यह कुत्ता पिछले 96 घंटों (4 दिन) से खुले आसमान के नीचे, भूखे-प्यासे और जानलेवा ठंड में अपने मालिक के पास बैठा था।
  • मालिक की रक्षा: रेस्क्यू टीम के सदस्यों ने बताया कि जब वे शव के करीब जाने लगे, तो कुत्ता आक्रामक हो गया। वह अपने मृत मालिक को किसी भी खतरे से बचाने के लिए रेस्क्यू टीम पर भौंकने लगा।
  • भावुक पल: टीम को कुत्ते का भरोसा जीतने और उसे शांत करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। अंततः, प्यार से समझाने और खाने का लालच देने के बाद ही वह शव से अलग हुआ। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि बचाव दल के सदस्यों की भी आंखें भर आईं।

रेस्क्यू ऑपरेशन और आधिकारिक बयान

प्रशासन और पुलिस द्वारा चलाए गए इस रेस्क्यू ऑपरेशन में शवों को निकालने के लिए हेलिकॉप्टर (Chopper) का इस्तेमाल किया गया। यह ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि वहां कई फीट बर्फ जमी हुई थी।

भरमौर के विधायक डॉ. जनक राज और स्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की कि शवों के साथ-साथ वफादार कुत्ते को भी एयरलिफ्ट किया गया। कुत्ते को सुरक्षित नीचे लाया गया और उसे शोकाकुल परिवार को सौंप दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर शवों का पोस्टमार्टम करवाया और उन्हें परिजनों को सौंप दिया। अधिकारियों ने युवाओं से अपील की है कि वे खराब मौसम में ट्रेकिंग जैसे जोखिम न उठाएं।

एक अमिट छाप

इस घटना ने पूरे हिमाचल और सोशल मीडिया पर लोगों को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ दो होनहार युवाओं की असामयिक मौत का मातम है, तो दूसरी तरफ उस बेजुबान जानवर की निस्वार्थ वफादारी की चर्चा। पीयूष और विकसित अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके कुत्ते ने साबित कर दिया कि वफादारी की कोई भाषा नहीं होती, वह सिर्फ महसूस की जाती है। यह घटना हमेशा याद दिलाती रहेगी कि रिश्तों की डोर मौत के बाद भी नहीं टूटती।

Updated On
Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

Next Story