नई दिल्ली: दिल्ली चिड़ियाघर का आकर्षण माने जाने वाले अफ्रीकी हाथी शंकर की असमय मृत्यु ने पशु प्रेमियों और पर्यटकों को गहरे आघात में डाल दिया है। शंकर को वर्ष 1998 में ज़िम्बाब्वे से भारत लाया गया था। उस समय वह केवल दो वर्ष का था और तभी से दिल्ली चिड़ियाघर का हिस्सा बन गया था। बीते तीन दशकों से वह यहां आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। परंतु सोमवार को शंकर ने 30 वर्ष की आयु में दम तोड़ दिया।

अफ्रीकी हाथी सामान्यतः 60 से 70 वर्ष तक जीवित रहते हैं। अपने लंबे कानों और विशाल कद के कारण यह प्रजाति विशेष पहचान रखती है। ऐसे में शंकर की कम उम्र में हुई मृत्यु ने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। चिड़ियाघर प्रशासन के अनुसार, शंकर लंबे समय से बीमार चल रहा था। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उसका इलाज कर रही थी, लेकिन लगातार प्रयासों के बावजूद उसकी सेहत में सुधार नहीं हुआ। अधिकारियों का कहना है कि मौत का सही कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

शंकर की मृत्यु के बाद पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने चिड़ियाघरों में बड़े आकार के जानवरों को रखने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हाथी जैसे विशाल और बुद्धिमान जीव को सीमित जगह में रखना उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। सीमित वातावरण और प्राकृतिक आवास की कमी से वे तनावग्रस्त हो सकते हैं और यह उनकी आयु पर भी असर डालता है।

कार्यकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि हाथी सामाजिक जीव होते हैं और झुंड में रहना पसंद करते हैं। अकेलेपन में वे अवसाद का शिकार हो सकते हैं। शंकर की असमय मृत्यु इस बात का संकेत है कि पशुओं की देखभाल और उनके प्राकृतिक व्यवहार को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाई जानी चाहिए।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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