‘रिजीम चेंज एजेंडा’ के तहत भड़की थी दिल्ली हिंसा ; पुलिस का दावा!
दिल्ली पुलिस ने 2020 के दंगों पर सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में बड़ा खुलासा किया है। पुलिस का कहना है कि ये दंगे एक सुनियोजित ‘सत्ता परिवर्तन साजिश’ का हिस्सा थे और इसलिए आरोपियों को जमानत नहीं मिलनी चाहिए।

2020 दिल्ली बड़े पैमाने पर दंगे हुए थे। कई मासूमों की जाने भी इस दंगे ने ली थी। 30 अक्टूबर को इस मामले में बड़ा खुलासा सामने आया है। यह खुलासा दिल्ली पुलिस ने किया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन किया है। इस घटना को सत्ता पलटने की साजिश के तहत चलाए गए ‘रिजीम चेंज ऑपरेशन’ का हिस्सा बताया गया है। हलफनामे के जरिए उमर खालिद और शरजील इमाम समेत अन्य की जमानत का विरोध किया। 177 पेजों का हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दायर जमानत याचिकाओं के विरोध में दिया गया है। चलिए जानते है विस्तार से।
दिल्ली पुलिस ने साल 2020 में भड़के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में चौंकाने वाला दावा किया है। पुलिस ने अदालत को बताया कि ये दंगे किसी आकस्मिक घटना का नतीजा नहीं थे, बल्कि यह एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश थी, जिसका उद्देश्य देश में शांति और कानून व्यवस्था को अस्थिर करना था।
हलफनामे में कहा गया है कि हिंसा को सांप्रदायिक भेदभाव की आग भड़काने के लिए योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम यानी CAA के खिलाफ असहमति को बहाना बनाकर कुछ समूहों ने इसे ‘भारत की संप्रभुता और अखंडता पर हमले’ में बदलने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक, यह आंदोलन धीरे-धीरे हिंसक रूप लेता गया और इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को धूमिल करना था।
दिल्ली पुलिस ने अपने हलफनामे में यह भी कहा कि दंगे ठीक उसी समय भड़काए गए जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत की यात्रा पर थे। इस दौरान देश की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए हिंसा का माहौल जानबूझकर बनाया गया। पुलिस ने इसे एक तरह का “रिजीम चेंज ऑपरेशन” करार दिया यानी ऐसी कोशिश, जिससे सरकार की स्थिरता पर सवाल खड़े किए जा सकें। पुलिस ने अदालत को बताया कि अब आरोपी जमानत याचिकाएं दायर कर ट्रायल की प्रक्रिया को धीमा करने की रणनीति अपना रहे हैं। हलफनामे में कहा गया कि जांच एजेंसियों की ओर से नहीं, बल्कि आरोपियों की ओर से ही कार्यवाही में देरी की जा रही है। पुलिस का आरोप है कि आरोपी अदालत की प्रक्रिया में सहयोग नहीं कर रहे हैं और कई बार जानबूझकर सुनवाई में बाधा डालते रहे हैं।
दिल्ली पुलिस ने आगे कहा कि मामला गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम UAPA के तहत दर्ज है, जिसमें आतंकवाद से जुड़े अपराधों के लिए जमानत मिलना बहुत कठिन होता है। पुलिस ने साफ कहा कि आरोपी अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करने में नाकाम रहे हैं और अगर उन्हें बेल मिलती है, तो वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या जांच की दिशा बदलने की कोशिश कर सकते हैं। हलफनामे में अंत में यह भी दोहराया गया है कि दिल्ली हिंसा किसी स्वाभाविक घटना का परिणाम नहीं थी, बल्कि यह राजनीतिक रूप से प्रेरित, सुनियोजित हिंसा थी, जिसे एक सोची-समझी रणनीति के तहत अंजाम दिया गया।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
