विवादों के बाद दिल्ली सरकार ने रद्द किया बोट प्रोजेक्ट ; जानिए क्या था 6.2 करोड़ का यमुना 'लग्ज़री बोट' योजना
दिल्ली सरकार ने यमुना निरीक्षण के लिए प्रस्तावित ₹6.2 करोड़ की लग्ज़री बोट योजना को विवाद के बाद रद्द कर दिया। वीआईपी सुविधाओं से लैस इस परियोजना पर उठे सवालों के बीच दो अधिकारियों को निलंबित किया गया और जांच के आदेश दिए गए, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता पर बहस तेज हो गई।

दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता
दिल्ली में यमुना नदी के निरीक्षण के लिए प्रस्तावित ₹6.2 करोड़ की लग्ज़री बोट योजना ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी। मामला तब और गंभीर हो गया जब यह सामने आया कि इन बोट्स को वीआईपी और वरिष्ठ अधिकारियों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था। बढ़ते विवाद और जन आलोचना के बाद दिल्ली सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इस पूरे टेंडर को रद्द कर दिया और दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया।
योजना क्या थी और इसका उद्देश्य क्या था?
दिल्ली सरकार के Irrigation and Flood Control (I&FC) Department ने 12 मार्च 2026 को दो अत्याधुनिक बोट खरीदने के लिए टेंडर जारी किया था। इन बोट्स की कुल लागत ₹6.2 करोड़ तय की गई थी, यानी प्रत्येक बोट पर लगभग ₹3.1 करोड़ खर्च होने थे।
इस योजना का उद्देश्य यमुना नदी पर होने वाले निरीक्षण कार्यों को आसान बनाना था, जिसमें शामिल हैं:
- नदी के प्रदूषण की निगरानी
- बाढ़ प्रबंधन की तैयारी
- यमुना सफाई परियोजनाओं का निरीक्षण
हालांकि, यह योजना जल्द ही अपने उद्देश्य से ज्यादा अपने “लक्ज़री फीचर्स” के कारण चर्चा में आ गई।
विवाद की वजह क्या बनी?
इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ा जब प्रस्तावित बोट्स की विशेषताओं का खुलासा हुआ। सामने आया कि ये सामान्य निरीक्षण बोट नहीं थीं, बल्कि इन्हें अत्यधिक आरामदायक और प्रीमियम सुविधाओं से लैस किया गया था। इन बोट्स में एयर कंडीशंड बंद केबिन, बिजनेस क्लास जैसी पुशबैक सीटें, वेगन लेदर इंटीरियर के साथ डिज़ाइनर फिनिश, खाने-पीने के लिए पैंट्री, एलईडी लाइटिंग, लकड़ी की सजावट और खुले डेक पर सोफा बैठने की व्यवस्था जैसी सुविधाएं शामिल थीं। इसके अलावा, प्रत्येक बोट में 16 से 20 लोगों के बैठने की क्षमता और हाई-पावर इंजन भी प्रस्तावित था। इन सभी सुविधाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या निरीक्षण कार्य के लिए इतनी विलासिता वास्तव में आवश्यक है।
जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, विपक्षी दलों विशेषकर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने इस योजना की कड़ी आलोचना की और इसे “जनता के पैसों की बर्बादी” तथा “गलत प्राथमिकताओं” का उदाहरण बताया। इस मुद्दे पर सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया कि जब यमुना नदी गंभीर प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है, तब करोड़ों रुपये वीआईपी सुविधाओं पर खर्च करना कितना उचित है। यह बहस केवल एक परियोजना तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने सरकार की प्राथमिकताओं और सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर व्यापक चर्चा को जन्म दिया।
प्रशासनिक कार्रवाई और सरकारी निर्णय:
विवाद बढ़ने के बाद दिल्ली सरकार ने त्वरित और सख्त कदम उठाए:
1. टेंडर रद्द
पूरी ₹6.2 करोड़ की बोट खरीद योजना को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया।
2. दो अधिकारियों का निलंबन
- एक कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer)
- एक सहायक अभियंता (Assistant Engineer)
इन दोनों पर बिना उचित अनुमति और प्रक्रिया के टेंडर जारी करने का आरोप लगा।
3. जांच के आदेश
मामले की गहन जांच के लिए औपचारिक जांच प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि टेंडर कैसे और किन परिस्थितियों में जारी हुआ।
4. नीति में बदलाव
मंत्री परवेश वर्मा ने स्पष्ट किया कि भविष्य में इस तरह की खरीद केवल आवश्यकता के आधार पर होगी।
यदि बोट्स खरीदी भी जाएंगी, तो उनका उपयोग केवल:
- प्रदूषण निगरानी
- बाढ़ नियंत्रण
- निगरानी कार्य
के लिए होगा, न कि वीआईपी सुविधा के लिए।
यमुना निरीक्षण का व्यापक महत्व:
हालांकि इस विवाद के चलते प्रस्तावित योजना को रोक दिया गया, लेकिन यमुना नदी के नियमित निरीक्षण की आवश्यकता पर कोई सवाल नहीं उठता। यमुना में लगातार भारी मात्रा में असंसाधित अपशिष्ट प्रवाहित हो रहा है, जिससे प्रदूषण की स्थिति गंभीर बनी हुई है। नदी में झाग (फोम) की समस्या भी समय-समय पर सामने आती रहती है, जो पर्यावरणीय चिंता का विषय है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
