मजदूर माता-पिता की बिटिया बनी अफसर... राजस्थान की अनीता देवड़ा ने UPSC 2025 में गाड़ा झंडा!
जोधपुर के भोपालगढ़ की बेटी अनीता देवड़ा ने अभावों को मात देकर UPSC 2025 में 644वीं रैंक हासिल की है। किसान पिता और मजदूर मां की बेटी की यह प्रेरक कहानी राजस्थान की सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर प्रशासनिक सेवा में चमकने की गौरवगाथा है। जानिए कैसे एक छोटे से गांव की प्रतिभा ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सफलता का परचम लहराया और अपनी मां के संघर्ष को सार्थक किया।

राजस्थान की मरुधरा ने एक बार फिर देश को गौरवान्वित किया है। जब इरादे फौलादी हों और सपनों में उड़ान भरने का साहस हो, तो अभावों की बेड़ियाँ खुद-ब-खुद टूट जाती हैं। जोधपुर जिले के भोपालगढ़ क्षेत्र की रहने वाली अनीता देवड़ा (जिन्हें कुछ हलकों में अनीता देवरा या अनीता देवी के नाम से भी जाना जा रहा है) ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा-2025 में 644वीं अखिल भारतीय रैंक हासिल कर यह सिद्ध कर दिया है कि सफलता किसी खास पृष्ठभूमि की मोहताज नहीं होती। मार्च 2026 में घोषित हुए इन परिणामों ने न केवल एक परिवार की तकदीर बदली है, बल्कि ग्रामीण भारत की उन हजारों बेटियों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगाई है जो विपरीत परिस्थितियों में बड़े सपने देखती हैं।
अनीता की यह यात्रा किसी संघर्षपूर्ण महागाथा से कम नहीं है। एक ऐसे परिवेश में जहाँ आज भी पितृसत्तात्मक ढांचा और सामाजिक मर्यादाएं शिक्षा के मार्ग में चुनौती बनकर खड़ी होती हैं, वहां एक किसान पिता और श्रमिक माता की बेटी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अनीता के पिता खेती-किसानी के जरिए परिवार का भरण-पोषण करते हैं, वहीं उनकी माता मजदूरी कर घर की आर्थिक स्थिति को संबल प्रदान करती रही हैं। संसाधनों के घोर अभाव और सीमित वित्तीय सामर्थ्य के बावजूद अनीता ने अपनी एकाग्रता को भंग नहीं होने दिया और राष्ट्रीय स्तर की इस सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में अपनी जगह बनाई।
इस ऐतिहासिक सफलता के केंद्र में अनीता की माँ का अटूट विश्वास और समर्थन रहा है। अनीता ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय सार्वजनिक रूप से अपने परिवार, विशेषकर अपनी माता को दिया है। उन्होंने रेखांकित किया कि ग्रामीण राजस्थान की पारंपरिक और अक्सर प्रतिबंधात्मक सामाजिक संरचनाओं के बीच उनकी माँ ने न केवल उन्हें शिक्षा के लिए प्रेरित किया, बल्कि हर कदम पर एक सुरक्षा कवच बनकर खड़ी रहीं। यह कहानी केवल एक परीक्षा उत्तीर्ण करने की नहीं है, बल्कि उन रूढ़ियों को तोड़ने की है जो बेटियों को चूल्हे-चौके तक सीमित रखने का प्रयास करती हैं।
अनीता देवड़ा की यह उपलब्धि अब एक राष्ट्रीय प्रेरणा बन चुकी है। टीवी9 भारतवर्ष सहित विभिन्न प्रमुख समाचार माध्यमों ने उनकी इस यात्रा को 'सफलता की मिसाल' के रूप में प्रमुखता दी है। उनकी 644वीं रैंक यह संदेश देती है कि यदि शैक्षणिक निष्ठा और परिवार का सहयोग मिले, तो राजस्थान के रेतीले धोरों से निकलकर भी देश की प्रशासनिक सेवा के गलियारों तक पहुँचा जा सकता है। यह सफलता न केवल भोपालगढ़ के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए एक जीवंत उदाहरण है जो आर्थिक विषमताओं को अपने सपनों के आड़े आने देते हैं।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
