चक्रवात मोंथा ने आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई। तेज हवाओं, मूसलाधार बारिश और बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हुए, फसलें नष्ट हुईं और भारी आर्थिक नुकसान हुआ। सरकार ने राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज किया है।

अक्टूबर 2025 में भारतीय तटों पर चक्रवात मोंथा ने आते ही कहर बरपाया। मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश में जहां इसका प्रभाव सबसे ज्यादा देखा गया। आंध्र प्रदेश के काकीनाडा और मछलीपट्टनम के बीच तट से टकराते हुए इस तूफान ने भारी तबाही मचाई। इस चक्रवात के कारण आंध्र प्रदेश में दो लोगों की मौत हुई और लगभग 2.14 लाख एकड़ फसल नष्ट हो गई, जिसमें धान, कपास, मक्का और बाजरा प्रमुख थे। हवा की रफ्तार लगभग 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई, जिससे कई जिलों में तेज़ बारिश, आंधी-तूफान और बाढ़ की स्थितियां बनीं।


इसके अलावा 42 मवेशी भी मारे गए। प्रभावित जिलों में करीब 18 लाख लोग प्रभावित हुए और 1,209 राहत शिविरों का आयोजन कर 1.16 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। राज्य सरकारों ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की कई टीमें बचाव कार्यों और राहत वितरण में लगा दी हैं। मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने त्वरित राहत प्रयासों का नेतृत्व करते हुए कहा कि एहतियाती कदमों की वजह से नुकसान अपेक्षाकृत कम हुआ है और प्रभावितों को जल्द से जल्द सहायता पहुंचाई जाएगी।


तूफान के कारण सड़कें, पुल, बिजली के तार और जलापूर्ति प्रणाली को भी भारी नुकसान पहुंचा, जिससे लगभग 1,424 करोड़ रुपये का अनुमानित आर्थिक नुकसान हुआ। पानी की निकासी के लिए उपाय किए जा रहे हैं किंतु अभी भी कई जगह जलजमाव की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि चक्रवात के अवशेषों के कारण अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश और तूफानी हवाएं जारी रहने की संभावना है। जिन इलाकों में बाढ़ और जलभराव हो सकता है, वहां खास सावधानी बरतने को कहा गया है।

चक्रवात मोंथा का नाम थाईलैंड ने दिया है, जिसका अर्थ है "सुगंधित पुष्प"। यह तूफान बंगाल की खाड़ी से उत्पन्न होकर तट पर पहुंचा, इसके बाद कमजोर होकर एक गहरे दबाव वाले क्षेत्र में परिवर्तित हो गया। इसने न केवल आंध्र प्रदेश बल्कि तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, और झारखंड समेत कई राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति पैदा की। इन क्षेत्रों में कई जिलों को रेड अलर्ट घोषित किया गया है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।


प्रशासन ने लोगों से सलाह दी है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइंस का पालन करें। राहत शिविरों, आपातकालीन सेवाओं और चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत किया गया है ताकि जरूरतमंदों को तुरंत मदद मिल सके।

इस चक्रवात का सबसे बड़ा सामाजिक और आर्थिक असर कृषक वर्ग पर पड़ा है, क्योंकि लाखों एकड़ फसलें जलमग्न हो गईं या पूरी तरह नष्ट हो गईं। इससे किसानों की आमदनी पर भारी प्रभाव पड़ा है और पुनर्वास के लिए विशेष पैकेज की मांग उठी है। सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे और पुनर्निर्माण के लिए कदम उठाने की बात कही है। कुल मिलाकर, चक्रवात मोंथा ने अपनी तीव्रता और व्यापक प्रभाव से पूर्वानुमान की सटीकता और बचाव प्रयासों के महत्व को दर्शाया। आगामी समय में ऐसी प्राकृतिक आपदा के लिए सतर्कता, बेहतर आपदा प्रबंधन और प्रभावी राहत कार्यों की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है, जिससे नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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