राहुल-विजयन विवाद से उपजी तल्खी के बीच 'इंडिया' गठबंधन में नया मोड़; डी राजा ने बीजेपी पर बोला करारा हमला
राहुल गांधी और पिनराई विजयन विवाद के बीच सीपीआई महासचिव डी राजा ने कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे पर बीजेपी सांसद की टिप्पणी को जातिवादी मानसिकता बताया।

कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे (बाएं) और सीपीआई महासचिव डी. राजा (दाएं), जिन्होंने नई दिल्ली में सोशल मीडिया के माध्यम से बीजेपी सांसद रमेश जिगाजिनगी के बयान को जातिवादी बताते हुए आरएसएस विवाद में खरगे का समर्थन किया।
INDIA alliance Congress Left relations : विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के भीतर वैचारिक मतभेदों और अंदरूनी खींचतान की खबरों के बीच एक दिलचस्प राजनीतिक समीकरण उभरकर सामने आया है। हाल ही में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और माकपा (सीपीएम) के दिग्गज नेता पिनराई विजयन के बीच पैदा हुए तनाव से जहां गठबंधन के भविष्य पर सवाल उठने लगे थे, वहीं अब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे के पक्ष में मजबूती से खड़े होकर नए सियासी संकेत दे दिए हैं। सीपीआई के महासचिव डी. राजा ने बीजेपी सांसद रमेश जिगाजिनगी की विवादित टिप्पणी की तीखी आलोचना करते हुए स्पष्ट किया है कि वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दक्षिणपंथी ताकतों के खिलाफ उनका संघर्ष और अधिक आक्रामक होगा।
इस पूरे राजनीतिक घमासान की शुरुआत कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खरगे के उस कदम से हुई, जिसने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संगठनात्मक ढांचे पर सीधे सवाल खड़े कर दिए। प्रियंक खरगे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को एक औपचारिक पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, पंजीकरण, फंडिंग के स्रोतों और वित्तीय पारदर्शिता को सार्वजनिक करने की मांग की थी। खरगे का तर्क था कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक संगठन को संवैधानिक जवाबदेही और पारदर्शिता के तय मानकों का पालन करना अनिवार्य है।
इस मांग के बाद राजनीतिक हलकों में उस समय उबाल आ गया जब विजयपुरा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी सांसद रमेश जिगाजिनगी ने इस पर बेहद तीखी और विवादित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने खरगे की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो भी आरएसएस के रास्ते में आया, वह नहीं बचा। इसके साथ ही उन्होंने यह आपत्तिजनक टिप्पणी भी कर दी कि इस दलित व्यक्ति को आरएसएस की चिंता करने की जरूरत ही क्या है। इस बयान के सार्वजनिक होते ही विपक्षी दलों ने इसे बीजेपी की दलित विरोधी और सामंतवादी मानसिकता का परिचायक बताते हुए आड़े हाथों लिया।
प्रियंक खरगे के खिलाफ की गई इस टिप्पणी के विरोध में सीपीआई महासचिव डी. राजा खुलकर मैदान में उतर आए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट साझा करते हुए बीजेपी सांसद के बयान को जातिवादी पूर्वाग्रह का साक्षात उदाहरण करार दिया। डी. राजा ने आरोप लगाया कि आरएसएस और बीजेपी के भीतर दलित समुदायों के प्रति गहरा द्वेष छिपा है, जो ऐसी टिप्पणियों के माध्यम से बाहर आता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर आरएसएस-बीजेपी को दलितों द्वारा अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करने और सवाल पूछने से इतनी परेशानी क्यों होती है। उन्होंने संकल्प दोहराया कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान की शक्ति के बल पर वे न सिर्फ आरएसएस से सवाल पूछते रहेंगे, बल्कि जाति व्यवस्था के समूल नाश के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
यह घटनाक्रम इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके ठीक पहले 'इंडिया' गठबंधन की आंतरिक बैठक के दौरान कांग्रेस और वामपंथी दलों के बीच अभूतपूर्व खटास देखने को मिली थी। बैठक का एक ऑडियो सामने आया था जिसमें राहुल गांधी ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि वे केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को गले नहीं लगा सकते क्योंकि केरल के धरातल पर उनके खिलाफ कांग्रेस की सीधी राजनीतिक लड़ाई जारी है। इसके जवाब में पिनराई विजयन ने भी तंज कसते हुए कहा था कि दोनों नेताओं के बीच कभी गले मिलने की परंपरा नहीं रही है, लेकिन राहुल गांधी का यह बयान एक नकारात्मक राजनीतिक संदेश देता है।
राहुल-विजयन विवाद से उपजे इस गंभीर गतिरोध के बीच सीपीआई द्वारा कांग्रेस नेता प्रियंक खरगे का खुलकर बचाव करना यह दर्शाता है कि गठबंधन के भीतर प्रादेशिक प्रतिद्वंद्विता चाहे जो हो, राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी और आरएसएस के खिलाफ लड़ाई में वामपंथी दल और कांग्रेस एक ही धुरी पर खड़े हैं। यह घटनाक्रम आने वाले समय में विपक्ष की एकजुटता और देश की भावी राजनीति की दिशा तय करने में बेहद निर्णायक साबित हो सकता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
