नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के बीच अचानक उठे राजनीतिक विरोध ने शनिवार को कानूनी मोड़ ले लिया, जब दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने चार भारतीय यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) कार्यकर्ताओं को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अदालत ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी, जिससे यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर और अधिक संवेदनशील हो गया है।

यह घटना भारत मंडपम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महत्व के एआई सम्मेलन के दौरान सामने आई। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं ने सम्मेलन स्थल पर अचानक ‘शर्टलेस प्रदर्शन’ किया। उन्होंने अपने ऊपरी वस्त्र उतारकर अंदर पहनी टी-शर्ट पर लिखे सरकार-विरोधी संदेश प्रदर्शित किए। इन संदेशों में प्रधानमंत्री पर “समझौता करने” का आरोप लगाने और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की आलोचना शामिल थी।

दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि प्रदर्शनकारियों ने विदेशी प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों की उपस्थिति में ऐसे नारे लगाए जिन्हें पुलिस ने “राष्ट्र-विरोधी” बताया। पुलिस के अनुसार, इस दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी, जिसमें तीन पुलिसकर्मी घायल हुए। जांच एजेंसियों ने अदालत से कहा कि आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को जब्त कर उनकी भूमिका की गहन पड़ताल की जानी है, जिसके लिए पुलिस हिरासत आवश्यक है।

पुलिस ने यह भी दावा किया कि यह विरोध प्रदर्शन किसी एक क्षणिक प्रतिक्रिया का परिणाम नहीं, बल्कि एक “बड़ी साजिश” का हिस्सा हो सकता है। जांच का दायरा अन्य संभावित प्रतिभागियों, आयोजन की योजना, वित्तपोषण और समन्वय की जांच तक विस्तारित किया जा सकता है। इसी आधार पर पुलिस ने अदालत से विस्तृत पूछताछ के लिए हिरासत की मांग की, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।

दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा था। उन्होंने आरोपों को अत्यधिक और हिरासत को अनावश्यक बताते हुए जमानत की मांग की। हालांकि, अदालत ने प्रारंभिक चरण में पुलिस जांच को प्राथमिकता देते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।

इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं भी जन्म दीं। सत्तारूढ़ दल ने इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की छवि को धूमिल करने वाला कदम बताया, जबकि यूथ कांग्रेस ने इसे युवाओं की चिंताओं को उजागर करने का वैध प्रयास करार दिया। विपक्षी दलों ने भी गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर सवाल उठाए, वहीं कुछ संगठनों ने समर्थन और विरोध में अलग-अलग स्वर बुलंद किए।

एआई जैसे उभरते और रणनीतिक क्षेत्र से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के बीच इस प्रकार का विरोध और उसके बाद की कानूनी कार्रवाई ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय छवि के संतुलन पर नई बहस को जन्म दिया है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया इस मामले की दिशा तय करेगी, लेकिन फिलहाल यह प्रकरण राष्ट्रीय राजनीति और कानूनी विमर्श के केंद्र में बना हुआ है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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