Arvind Kejriwal Contempt of Court PIL : दिल्ली की सियासत और न्यायपालिका के बीच चल रही खींचतान ने अब एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व—अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह—के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) की एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। इस कानूनी कदम ने राजधानी के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर अदालत की गरिमा और उसके सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत न्यायिक प्रक्रिया को सार्वजनिक रूप से प्रभावित करने और अदालत के नियमों को धता बताने का प्रयास किया गया है।

मामले की संजीदगी को समझते हुए वकील वैभव सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में विस्तार से उल्लेख किया गया है कि जब दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में 'रिक्यूज़ल एप्लीकेशन' (मामले से हटने की अर्जी) पर अपनी दलीलें दे रहे थे, तब उस संवेदनशील कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को अवैध रूप से सोशल मीडिया पर पब्लिश किया गया। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह दिल्ली हाई कोर्ट के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) नियमों का स्पष्ट और जानबूझकर किया गया उल्लंघन है। आरोप है कि यह कृत्य केवल एक भूल नहीं बल्कि न्यायिक संस्थान की छवि को धूमिल करने और जनता के बीच भ्रम फैलाने का एक सुनियोजित प्रयास है।

इस विवाद की पृष्ठभूमि सोमवार, 20 अप्रैल को हुई उस महत्वपूर्ण सुनवाई से जुड़ी है, जिसमें जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल की उस अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया था, जिसमें उन्हें इस केस से अलग करने की मांग की गई थी। जस्टिस शर्मा ने अपने फैसले में स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह खुद को इस मामले से अलग नहीं करेंगी। इस न्यायिक टिप्पणी के तुरंत बाद राजनीति तेज हो गई और मंगलवार को आप सांसद संजय सिंह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जस्टिस शर्मा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सिंह ने आरोप लगाया कि जस्टिस शर्मा के परिवार के सदस्य सरकारी वकील के अधीन कार्यरत हैं और उनकी व्यक्तिगत विचारधारा न्यायिक कार्यों को प्रभावित कर सकती है, जो अवमानना याचिका का एक और मुख्य आधार बना है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अब केवल एक राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अदालत के नियमों की रक्षा का एक बड़ा मुद्दा बन गया है। याचिका में मांग की गई है कि इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जाए और कोर्ट की कार्यवाही को अवैध रूप से प्रसारित करने व न्यायाधीशों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए जाएं। अब सबकी नजरें दिल्ली उच्च न्यायालय के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वह अपने ही नियमों के उल्लंघन पर इन दिग्गज राजनेताओं के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करेगा। यह फैसला न केवल इन नेताओं का भविष्य तय करेगा, बल्कि डिजिटल युग में न्यायिक गरिमा को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर भी पेश करेगा।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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