नई दिल्ली: उप राष्ट्रपति ने संसद के सेंट्रल हॉल, संविधान सदन में आयोजित संविधान दिवस (साम्विधान दिवस) समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संविधान केवल कानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि सैकड़ों लाख स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, बलिदान और सपनों का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि संविधान ने करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं को पूरा करते हुए देश को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाने की नींव रखी।

इस अवसर पर उप राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान ने भारत की विविधता में एकता बनाए रखने के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों के लिए सामाजिक न्याय और आर्थिक सशक्तिकरण की मजबूत प्रतिबद्धता को भी स्थापित किया। उन्होंने संविधान को भारतीय लोकतंत्र की आत्मा बताते हुए इसके महत्व को रेखांकित किया। उप राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान ने केवल शासन व्यवस्था को परिभाषित नहीं किया बल्कि नागरिकों के अधिकारों, कर्तव्यों और न्यायसंगत समाज की दिशा को भी स्पष्ट किया।

समारोह में सांसदों, विधायकों और विभिन्न सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ नागरिक समाज के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्घाटन और संचालन संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सम्मान के भाव से किया गया। उप राष्ट्रपति ने विशेष रूप से संविधान में निहित समानता, स्वतंत्रता और बंधुता के मूल्यों पर प्रकाश डाला और कहा कि ये मूल्य भारतीय समाज के लिए स्थायी मार्गदर्शक सिद्ध होते रहेंगे।



उप राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि संविधान न केवल शासन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह नागरिकों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने का साधन भी है। उन्होंने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे संविधान के सिद्धांतों को समझें और अपने जीवन में उसका पालन करें। उनके अनुसार, संविधान केवल एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि हर भारतीय के जीवन में न्याय, समानता और स्वतंत्रता के आदर्शों का मार्गदर्शन करता है।

समारोह के दौरान संविधान के महत्व पर चर्चा की गई और इसके अनुच्छेदों, नागरिक अधिकारों और समाज में न्याय के योगदान को विस्तार से उजागर किया गया। उप राष्ट्रपति ने सभी नागरिकों से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि संविधान के मूल सिद्धांतों का पालन करते हुए वे समाज और देश की प्रगति में योगदान दें।

समाप्ति में उप राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान भारत की सदियों पुरानी स्वतंत्रता की यात्रा, सामाजिक न्याय की आकांक्षाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक समग्र प्रतीक है, और इसका सम्मान प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। संविधान दिवस का यह समारोह इस बात की याद दिलाता है कि लोकतंत्र केवल शासन का माध्यम नहीं, बल्कि हर नागरिक के अधिकार और जिम्मेदारी का स्तंभ है।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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