Congress Leader Meet Mayawati : उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी कूटनीतिक और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह गरमा दिया है। देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और एक मौजूदा सांसद को बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के आवास से बिना मुलाकात किए ही वापस लौटना पड़ा है। बुधवार, 20 मई को राजधानी लखनऊ में घटे इस हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम के बाद राजनीतिक पंडितों के बीच कयासों का बाजार बेहद गर्म हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आगामी प्रस्तावित उत्तर प्रदेश दौरे से ठीक पहले कांग्रेस के इस बड़े कदम और बसपा प्रमुख के कड़े रुख ने भविष्य की नई राजनीतिक बिसात की ओर इशारा कर दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत बुधवार दोपहर को हुई, जब कांग्रेस के कद्दावर नेता राजेंद्र पाल गौतम और बाराबंकी लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद तनुज पूनिया अचानक मायावती के मॉल एवेन्यू स्थित वीआईपी आवास पर जा पहुंचे। अचानक पहुंचे इन दिग्गज नेताओं ने सुरक्षाकर्मियों के जरिए बसपा सुप्रीमो से मुलाकात की इच्छा जताते हुए अपना संदेश अंदर भिजवाया। सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों ने तत्काल यह संदेश मायावती तक पहुंचाया, लेकिन कूटनीतिक हलकों को हैरान करते हुए बसपा प्रमुख ने कांग्रेस नेताओं से मिलने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों ही नेताओं को गेट से ही वापस लौटना पड़ा। राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि राहुल गांधी के दौरे से पहले कांग्रेस नेता मायावती के साथ दलित और पिछड़ा वर्ग से जुड़े कुछ बेहद गोपनीय व अहम मुद्दों पर संवाद स्थापित करना चाहते थे, लेकिन मायावती के इस सख्त रुख ने कांग्रेस की कोशिशों पर पानी फेर दिया।

मायावती के घर के बाहर हुई इस राजनीतिक असहजता के बाद कांग्रेस डैमेज कंट्रोल की मुद्रा में आ गई और नेताओं की ओर से सफाई भरे बयान सामने आने लगे। इस पूरे वाकये पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बाराबंकी के सांसद तनुज पूनिया ने इसे एक सामान्य शिष्टाचार भेंट करार देने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय में अनुसूचित जाति (एससी) विभाग की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें राजेंद्र पाल गौतम सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे। इसी बैठक के दौरान बसपा प्रमुख मायावती के स्वास्थ्य को लेकर चर्चा छिड़ी। चूंकि कांग्रेस का प्रांतीय दफ्तर मायावती के सरकारी आवास के बिल्कुल पास ही स्थित है, इसलिए नेताओं ने वहां जाने का फैसला कर लिया।

सांसद तनुज पूनिया ने कूटनीतिक कयासों को खारिज करने का दावा करते हुए कहा कि राजेंद्र पाल गौतम ने सभी से कहा था कि मायावती दलित समाज की एक अत्यंत वरिष्ठ और आदरणीय नेता हैं, जिनकी उम्र अब 70 वर्ष के करीब हो चुकी है, ऐसे में एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि होने के नाते उनका हालचाल जानना उनका कर्तव्य है। सांसद ने स्पष्ट किया कि वे बिना किसी पूर्व सूचना, फोन कॉल या आधिकारिक अपॉइंटमेंट के सीधे वहां पहुंचे थे। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से केवल इतना पूछा था कि यदि बीएसपी प्रमुख व्यस्त न हों, तो वे सिर्फ दो मिनट के लिए उनका हालचाल जान लें। पूनिया के मुताबिक, इस यात्रा का कोई छुपा हुआ राजनीतिक एजेंडा नहीं था और चूंकि मायावती उस वक्त किसी आवश्यक कार्य में व्यस्त थीं, इसलिए उन्हें समय नहीं मिल सका और वे मर्यादापूर्वक वापस लौट आए।

भले ही कांग्रेस इस पूरे मामले को एक सामान्य और गैर-राजनीतिक मुलाकात बताकर शांत करने की कोशिश कर रही हो, लेकिन उत्तर प्रदेश की जमीनी सियासत में इसे एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। दलित राजनीति के केंद्र बिंदु माने जाने वाले उत्तर प्रदेश में बसपा और कांग्रेस के बीच की यह दूरी आने वाले चुनावों और गठबंधन की संभावनाओं के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती द्वारा कांग्रेस के मौजूदा सांसद और बड़े चेहरों को बिना वक्त दिए वापस लौटाना यह साफ संकेत देता है कि बीएसपी फिलहाल कांग्रेस या विपक्षी खेमे के साथ किसी भी तरह के कूटनीतिक सामंजस्य के मूड में नहीं है। इस घटना ने आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए कड़े मुकाबले और दलीय टकराव के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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