चीन का 'माइटी ड्रैगन' अब सीमा पर तैनात: LAC के करीब जे-20 की बढ़ती तादाद से भारत के लिए नई चुनौती
चीन ने अपने घातक स्टील्थ फाइटर जेट जे-20 को अब भारत की सीमा के करीब तैनात कर दिया है। 400 से अधिक की संख्या और तेजी से बढ़ते बेड़े के साथ, यह 'माइटी ड्रैगन' भारतीय रक्षा तंत्र के लिए कितनी बड़ी और नई चुनौती बन गया है? जानिए पूरी खबर।

चीन का जे-20 फाइटर जेट अब पीएलएएएफ की सभी पांचों कमानों में तैनात है। यह 350-400 विमानों वाला बेड़ा भारत के लिए नई सुरक्षा चुनौतियां पेश कर रहा है।
चीन का चेंगदू जे-20 'माइटी ड्रैगन' कभी केवल पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) की चुनिंदा इकाइयों तक सीमित एक दुर्लभ और उच्च-स्तरीय स्ट्रैटेजिक हथियार माना जाता था। हालांकि, वर्ष 2026 तक सामने आए आंकड़ों ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। आज यह स्टील्थ फाइटर जेट चीन की सैन्य रणनीति का एक अनिवार्य और मुख्य हिस्सा बन चुका है। वर्ष 2019 में जब यह विमान पहली बार वुहू एयर बेस की 9वीं एविएशन ब्रिगेड के साथ सक्रिय हुआ था, तब इसे केवल कुछ विशिष्ट स्क्वाड्रन के लिए आरक्षित रखा गया था। लेकिन अब यह विमान चीन की सभी पांचों भौगोलिक कमानों—उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य—में तैनात कम से कम आठ कॉम्बैट ब्रिगेड का अभिन्न अंग है।
भारतीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से सबसे महत्वपूर्ण बदलाव पश्चिमी थिएटर कमान में देखा गया है, जो सीधे तौर पर भारत-चीन सीमा की निगरानी करती है। यहाँ 111वीं ब्रिगेड (कोरला) और 97वीं ब्रिगेड (दाज़ू) अब इन उन्नत लड़ाकू विमानों का संचालन कर रही हैं। कोरला एयर बेस की भूमिका एक प्रमुख परिचालन केंद्र के रूप में और अधिक बढ़ गई है। यह तैनाती इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बीजिंग अब भारत के साथ संभावित संघर्ष वाले क्षेत्रों में अपने सबसे आधुनिक हथियारों का उपयोग करने में पूरी तरह आश्वस्त है। जे-20 का यह व्यापक प्रसार साबित करता है कि पीएलएएएफ के पास अब न केवल विमानों की पर्याप्त आपूर्ति है, बल्कि पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित पायलट भी उपलब्ध हैं।
सैन्य विश्लेषकों और ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस के अनुमानों के अनुसार, चीन ने अपनी उत्पादन क्षमता में तीव्र वृद्धि की है। वर्तमान में जे-20 का बेड़ा 350 से 400 विमानों तक पहुंचने का अनुमान है, जो प्रति वर्ष लगभग 100 विमानों की दर से निर्मित किए जा रहे हैं। पांचवीं पीढ़ी के विमानों का निर्माण अत्यधिक जटिल प्रक्रिया होती है, जिसमें विशेष इंजन और गहन प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। इसके बावजूद, चीन का जे-20 को एक 'दुर्लभ परिसंपत्ति' से हटाकर 'मेनस्ट्रीम' युद्धक मंच में तब्दील करना उसकी सैन्य शक्ति में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है। यह रणनीतिक बदलाव भारत के लिए वायु रक्षा और सीमा सुरक्षा के संदर्भ में एक नई और गंभीर चुनौती बनकर उभरा है।

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