छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: TET में गलत श्रेणी भरने वाले अभ्यर्थी अयोग्य घोषित
क्या आवेदन में एक छोटी सी गलती शिक्षक बनने का सपना तोड़ सकती है? छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के एक सख्त फैसले ने TET अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जानिए क्यों कोर्ट ने परिणाम के बाद श्रेणी सुधारने से किया इनकार।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट परिसर, जहां सात अभ्यर्थियों द्वारा परीक्षा परिणाम के बाद अपनी श्रेणी सुधारने की याचिका को न्यायालय ने खारिज कर दिया।
छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) में शामिल होने वाले सात अभ्यर्थियों के लिए एक अदालती फैसला उनके भविष्य पर भारी पड़ गया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने उन आवेदकों की याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है, जिन्होंने परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद अपनी श्रेणी में सुधार की मांग की थी। इन अभ्यर्थियों ने तर्क दिया था कि ऑनलाइन आवेदन भरते समय भूलवश उन्होंने 'ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर' के स्थान पर 'ओबीसी क्रीमी लेयर' का विकल्प चुन लिया था, जिसके कारण उन्हें परीक्षा में अयोग्य घोषित कर दिया गया।
मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए, एक याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उसने 150 में से 80 अंक प्राप्त किए थे। ओबीसी क्रीमी लेयर में होने के कारण उत्तीर्ण होने के लिए उसे 90 अंकों (60 प्रतिशत) की आवश्यकता थी, जबकि ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर श्रेणी में उसे पात्रता के लिए छूट मिल सकती थी। अपनी इस मानवीय भूल का हवाला देते हुए अभ्यर्थियों ने परिणाम में बदलाव की गुहार लगाई थी। वहीं, छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के अधिवक्ता अविनाश सिंह ने विरोध करते हुए स्पष्ट किया कि आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 9 दिसंबर से 11 दिसंबर 2025 तक सुधार के लिए विशेष विंडो उपलब्ध कराई गई थी, जिसका लाभ इन अभ्यर्थियों ने नहीं उठाया।
न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि आवेदन पत्र में सही जानकारी भरने की पूरी जिम्मेदारी स्वयं अभ्यर्थी की होती है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि एक बार सुधार विंडो बंद होने के बाद, आवेदन में दर्ज विवरण अंतिम मान लिए जाते हैं, जो मूल्यांकन और परिणाम का आधार बनते हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि परिणाम आने के बाद श्रेणी में किसी भी तरह का बदलाव परीक्षा की पवित्रता और निष्पक्षता को खतरे में डाल सकता है। यह फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में तकनीकी अनुशासन और समयबद्धता का पालन करना न केवल आवश्यक है, बल्कि यह चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए अनिवार्य भी है।

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