नक्सल प्रभावित जंगलों के बीच बसा गांव आखिर हुआ रोशन ; आज़ादी के 78 साल बाद जगमगाया खैरागढ़
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के सल्हेवारा वन क्षेत्र स्थित नक्सल प्रभावित सुदूर गांव में आजादी के 78 साल बाद पहली बार बिजली पहुंची। घने जंगल, पहाड़ी इलाका और नक्सली गतिविधियां वर्षों तक बाधा बनी रहीं। अब गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और डिजिटल कनेक्टिविटी के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में आजादी के बाद पहली बार पहुंची बिजली
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) जिले के सुदूर सल्हेवारा वन क्षेत्र में स्थित एक गांव ने आखिरकार वह दिन देख लिया, जिसका इंतजार यहां के लोगों ने आजादी के बाद से लगभग 78 वर्षों तक किया। दशकों तक अंधेरे में जीवन बिताने वाले ग्रामीणों के घरों में पहली बार बिजली पहुंची है। यह केवल एक सरकारी परियोजना की सफलता नहीं, बल्कि उन लोगों के जीवन में नई उम्मीद और विकास की किरण लेकर आई है, जो वर्षों तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे।
यह गांव घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्र में स्थित है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण यहां तक बिजली पहुंचाना वर्षों तक संभव नहीं हो सका। सड़क संपर्क की कमी, कम आबादी और दुर्गम वन क्षेत्र ने भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के विस्तार में बड़ी बाधा उत्पन्न की। विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) का प्रभाव रहा, जिसके चलते सरकारी अधिकारियों और बिजली विभाग के कर्मचारियों के लिए विकास कार्यों को अंजाम देना आसान नहीं था। यही वजह रही कि आजादी के करीब आठ दशक बाद भी यह गांव राष्ट्रीय बिजली ग्रिड से नहीं जुड़ सका।
#WATCH | Chhattisgarh: Naxal affected area Khairagarh received electricity after 78 years. pic.twitter.com/zqsH6LOSta
— ANI (@ANI) June 26, 2026
हालांकि, राज्य बिजली विभाग ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से इस चुनौतीपूर्ण कार्य को पूरा किया। इंजीनियरों और कर्मचारियों ने घने जंगलों तथा कठिन पहाड़ी रास्तों से होकर विद्युत लाइनें बिछाईं और अंततः गांव को बिजली आपूर्ति से जोड़ दिया। प्रशासन का कहना है कि यह परियोजना उन दुर्गम और पहले तक पहुंच से बाहर रहे इलाकों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करने की व्यापक सरकारी पहल का हिस्सा है।
बिजली पहुंचने के बाद ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। स्थानीय निवासी नरेश ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, "यहां बहुत लंबे समय तक बिजली नहीं थी। अब काफी सुविधा हो गई है।" उनका यह बयान उन वर्षों की कठिनाइयों और आज मिले बदलाव की खुशी को बयां करता है।
बिजली आने के बाद गांव के लोगों के जीवन में कई सकारात्मक परिवर्तन देखने की उम्मीद है। अब बच्चों को शाम ढलने के बाद पढ़ाई के लिए रोशनी मिलेगी। घरों में पंखे, बल्ब, टेलीविजन और मोबाइल चार्जिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार की संभावना है, क्योंकि अब दवाइयों को सुरक्षित रखने के लिए शीत भंडारण की सुविधा विकसित की जा सकेगी और स्वास्थ्य केंद्र अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे। इसके अलावा छोटे व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और संचार के साथ-साथ डिजिटल कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।
यह उपलब्धि केवल बिजली पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो वर्षों तक भौगोलिक कठिनाइयों और नक्सली हिंसा के कारण विकास से दूर रहे। सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार ऐसे इलाकों को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाता है।
इस घटनाक्रम का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी वर्ष केंद्रीय गृह मंत्रालय ने घोषणा की थी कि देश में अब कोई भी जिला आधिकारिक रूप से सक्रिय नक्सल हिंसा से प्रभावित श्रेणी में नहीं है। हालांकि, कई जिलों में विकास कार्यों और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी नए ढांचे के तहत जारी रहेगी। ऐसे में खैरागढ़ के इस सुदूर गांव तक बिजली पहुंचना केवल एक बुनियादी सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि दशकों के इंतजार, संघर्ष और विकास की दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
