तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद स्थित ऐतिहासिक चंचलगुडा सेंट्रल जेल एक अनोखी और चर्चा में आने वाली पहल को लेकर सुर्खियों में है। मंगलवार को जेल प्रशासन ने “फील द जेल” नामक विशेष कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसके तहत अब आम नागरिक सीमित समय के लिए जेल के भीतर रहकर कैदियों जैसी जिंदगी का अनुभव कर सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य लोगों को जेल जीवन की वास्तविक परिस्थितियों, अनुशासन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के महत्व से रूबरू कराना बताया गया है।

इस कार्यक्रम के तहत इच्छुक लोग 12 घंटे या 24 घंटे तक जेल परिसर में रह सकेंगे। 12 घंटे के अनुभव के लिए 1,000 रुपये और पूरे 24 घंटे जेल में बिताने के लिए 2,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। हालांकि, 18 वर्ष से कम आयु के लोगों को इसमें शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई है। प्रतिभागियों को विशेष रूप से तैयार किए गए जेल सेल में रखा जाएगा, जहां उन्हें वही भोजन परोसा जाएगा जो सामान्य कैदियों को दिया जाता है। इसके साथ ही उन्हें जेल के नियमों और दिनचर्या का पालन भी करना होगा, ताकि वे वास्तविक जेल जीवन को करीब से समझ सकें।



सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में जेल के भीतर की साधारण व्यवस्था दिखाई दी, जिसमें संकरी चारपाइयां, काले कंबल, स्टील की प्लेटें और धातु के गिलास रखे हुए नजर आए। इन तस्वीरों ने लोगों के बीच उत्सुकता के साथ-साथ बहस भी छेड़ दी है। कई लोग इस पहल को जागरूकता और सुधारात्मक सोच की दिशा में सकारात्मक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं भी दी हैं।

एक सोशल मीडिया यूजर ने कटाक्ष करते हुए सवाल उठाया कि क्या प्रतिभागियों को जेल में कैदियों के बीच होने वाली हिंसा, भय और कठिन परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ेगा। यूजर ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या उन्हें जेल में होने वाली मारपीट, कोने में शौच करने जैसी मजबूरियां या कैदियों के बीच होने वाले हमलों का भी अनुभव कराया जाएगा। यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और कार्यक्रम को लेकर बहस और गहरी हो गई।

इस पहल का उद्घाटन तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने किया। इसी अवसर पर जेल परिसर में एक नए “जेल म्यूजियम” की भी शुरुआत की गई, जिसमें जेल के इतिहास, सुधारात्मक गतिविधियों और कारागार व्यवस्था से जुड़ी जानकारियां प्रदर्शित की गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्यक्रम विशेष रूप से युवाओं को कानून, अनुशासन और अपराध के परिणामों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

“फील द जेल” पहल ने जहां लोगों के बीच रोमांच और जिज्ञासा पैदा की है, वहीं इसने जेल सुधार और दंड व्यवस्था को लेकर नई चर्चा भी शुरू कर दी है। जेल प्रशासन की यह कोशिश आने वाले समय में देश की अन्य जेलों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है, जहां सजा के साथ-साथ जागरूकता और सुधार को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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