क्या 18,000 वाली सैलरी सीधे 69,000 हो जाएगी? मोदी सरकार ने बढ़ाया DA, कर्मचारियों की खुली किस्मत!
नए साल पर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की हुई चांदी! मोदी कैबिनेट ने महंगाई भत्ते में वृद्धि के साथ-साथ शिपिंग और ग्रामीण सड़कों को लेकर लिए कई बड़े फैसले। क्या हैं 8वें वेतन आयोग की नई मांगें और कैसे बदलेगी आपकी सैलरी? पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने नए साल की दहलीज पर खड़े लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरते हुए शनिवार को एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि सरकार ने महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि को मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के साथ ही अब महंगाई भत्ते की दर मूल वेतन के 58 प्रतिशत से बढ़कर सीधे 60 प्रतिशत के आंकड़े पर पहुंच गई है। यह कदम न केवल सरकारी खजाने पर प्रभाव डालेगा, बल्कि उन लाखों परिवारों को सीधे तौर पर राहत पहुंचाएगा जो बढ़ती कीमतों और मुद्रास्फीति की मार झेल रहे हैं।
सरकार का यह निर्णय 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी माना जाएगा, जिसका सीधा अर्थ यह है कि कर्मचारियों को पिछले महीनों का एरियर भी प्राप्त होगा। इस वृद्धि से देश के लगभग 50.5 लाख सेवारत कर्मचारियों और 68.3 लाख पेंशनभोगियों को सीधा वित्तीय लाभ मिलने वाला है। आंकड़ों की दृष्टि से देखें तो इस उदार फैसले से सरकारी खजाने पर सालाना 6,791 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व अक्टूबर में सरकार ने डीए को 55 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत किया था, जो जुलाई 2025 से लागू हुआ था। सरकार द्वारा वर्ष में दो बार, जनवरी और जुलाई में की जाने वाली यह कवायद दरअसल कर्मचारियों की क्रय शक्ति को सुरक्षित रखने और बाजार की महंगाई के बीच संतुलन बिठाने का एक व्यवस्थित माध्यम है।
एक तरफ जहां भत्ते में वृद्धि की यह लहर चल रही है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारी संगठनों के बीच 8वें वेतन आयोग के गठन और उसकी सिफारिशों को लेकर हलचल तेज हो गई है। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने सरकार के समक्ष एक विस्तृत मांग पत्र प्रस्तुत किया है, जिसमें फिटमेंट फैक्टर को 3.83 तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। यदि यह मांग स्वीकार कर ली जाती है, तो न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 69,000 रुपये हो सकता है। इसके अतिरिक्त, कर्मचारी संगठनों ने 'परिवार' की परिभाषा का विस्तार करते हुए उसमें आश्रित माता-पिता को शामिल करने और वेतन विसंगतियों को दूर करने जैसी दूरगामी मांगें भी रखी हैं।
आर्थिक और बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर भी कैबिनेट ने कुछ बड़े कदम उठाए हैं। समुद्री व्यापार को सुरक्षा कवच प्रदान करने के उद्देश्य से 13,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ 'सोवरेन मैरीटाइम फंड' को मंजूरी दी गई है। यह फंड भारतीय ध्वज वाले और भारत आने-जाने वाले जहाजों को किफायती बीमा कवर प्रदान करेगा, जो वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा। साथ ही, ग्रामीण कनेक्टिविटी को प्राथमिकता देते हुए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) को 2028 तक विस्तार दिया गया है, जिसके लिए 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया गया है। सरकार के ये निर्णय न केवल कर्मचारियों के व्यक्तिगत जीवन में खुशहाली लाएंगे, बल्कि देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और समुद्री सुरक्षा को भी नई ऊर्जा प्रदान करेंगे।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
