भारत की सीमाओं पर बदलता जनसांख्यिकीय परिदृश्य अब राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बन गया है। इसी गंभीरता को रेखांकित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या संरचना में हो रहे बदलावों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। हाल ही में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए, गृह मंत्री ने संबंधित आयोग को इन क्षेत्रों में जनसंख्या परिवर्तन का वैज्ञानिक अध्ययन करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

यह निर्देश एक ऐसे समय में सामने आया है जब सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ प्रमुख महानगरों और औद्योगिक शहरों में भी जनसांख्यिकीय संरचना जटिल होती जा रही है। गृह मंत्री ने आयोग के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे इन क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए गहन फील्ड विजिट करें। भारत सरकार अवैध प्रवासन और सीमावर्ती इलाकों में जनसंख्या असंतुलन को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देख रही है। इस फील्ड अध्ययन के उपरांत जो रिपोर्ट तैयार की जाएगी, वह भविष्य में नीतिगत निर्णयों और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीतियों के निर्धारण में एक निर्णायक दस्तावेज साबित होगी।

उल्लेखनीय है कि भारत अपनी सीमाएं नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, चीन, भूटान, अफगानिस्तान और म्यांमार के साथ साझा करता है। इन सभी में बांग्लादेश के साथ भारत की सबसे लंबी सीमा है, जबकि नेपाल के साथ भारत की सीमा खुली हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल के साथ खुली सीमा का लाभ उठाकर घुसपैठ की घटनाएं हो रही हैं और विभिन्न क्षेत्रों में आबादी का अनधिकृत जमावड़ा देखने को मिला है। इसी क्रम में, भारत सरकार द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों का वैज्ञानिक विश्लेषण कराने की प्रक्रिया को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर ही सरकार भविष्य में ठोस कदम उठाएगी।

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