देशभर में भाजपा का प्रभुत्व चरम पर; 1654 विधायकों के साथ बना नया रिकॉर्ड
बिहार चुनाव में एनडीए की बड़ी जीत के बाद भाजपा देशभर में 1654 विधायकों के साथ अपने अब तक के सबसे मज़बूत विधायी स्तर पर पहुँच गई है। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया कि पार्टी अगले दो वर्षों में 1800 विधायकों का आंकड़ा पार कर सकती है। यह विस्तार राष्ट्रीय राजनीति के समीकरण बदलने वाला संकेत माना जा रहा है।

बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ऐतिहासिक जीत ने न केवल राज्य की राजनीति का समीकरण बदला, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी की ताकत में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की। इस जीत के साथ भाजपा पूरे देश में अब 1654 विधायकों के विशाल आँकड़े पर पहुँच गई है, जो पार्टी के लिए अब तक का सबसे बड़ा विधायी विस्तार माना जा रहा है।
सोमवार को भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर कहा कि भाजपा वर्तमान में राज्य विधानसभाओं में अपनी “सर्वोच्च शक्ति” पर है और यह वृद्धि लगातार तेज़ी से बढ़ रही है। उनकी टिप्पणी ने इस आँकड़े के राजनीतिक महत्व को और भी प्रमुखता से रेखांकित किया।
मालवीय ने दावा किया कि मौजूदा गति को देखते हुए पार्टी अगले दो वर्षों में 1800 विधायकों का आंकड़ा पार कर सकती है। उन्होंने कहा कि 1985 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उत्पन्न सहानुभूति लहर के बीच कांग्रेस ने लगभग 2018 विधायकों तक पहुँचकर अपना सर्वोच्च स्तर हासिल किया था। उस समय राजनीतिक माहौल पूरी तरह अलग था और सत्ता को मज़बूत करना अपेक्षाकृत आसान माना जाता था।
BJP is now at its highest-ever strength in State Assemblies and the momentum is only growing.
— Amit Malviya (@amitmalviya) November 17, 2025
At this pace, the BJP will comfortably cross the 1800-seat mark in the next two years.
For comparison, Congress touched its peak of around 2018 seats in 1985, riding on a massive… pic.twitter.com/6huvSTJc95
उन्होंने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि कांग्रेस को अपना चरम “विरासत में मिला”, जबकि भाजपा ने अपनी उन्नति “अर्जित” की है—सीट दर सीट, राज्य दर राज्य और संघर्ष दर संघर्ष। सोशल मीडिया पर वायरल इस बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा के उभार और विपक्ष की चुनौतियों को लेकर नए विमर्श को हवा दी है।
बिहार में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद देशभर में भाजपा की विधायी उपस्थिति अब एक बार फिर आम चुनाव की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बढ़ती विधायी शक्ति न केवल प्रदेशों में पार्टी के संगठनात्मक विस्तार को दर्शाती है, बल्कि आने वाले समय में विधायी राजनीति के समीकरण भी नई दिशा ले सकते हैं।
भारत की राजनीति इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहाँ बढ़ती संख्या में विधायक भाजपा की राष्ट्रीय रणनीति को मज़बूती दे रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह विस्तार किस तरह विपक्षी राजनीति को प्रभावित करेगा, यह देखने योग्य होगा। लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट है कि भाजपा के लिए यह आँकड़ा एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत है।
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
