मैकाले शिक्षा पद्धति से मुक्ति की ओर बढ़ा भारत, भारतीय शिक्षा बोर्ड ने लागू किया एनसीएफ 2023
भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी) ने बालवाटिका से माध्यमिक स्तर तक राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा को पूर्णतः लागू कर देश का पहला ऐसा विद्यालयी बोर्ड बनने का गौरव प्राप्त किया है।

हरिद्वार में भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी) द्वारा आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बालवाटिका से लेकर माध्यमिक स्तर तक राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ 2023) को पूर्णतः लागू करने की घोषणा की गई है, जिससे देश में दक्षता आधारित और समग्र शिक्षा व्यवस्था की शुरुआत होगी।
हरिद्वार। भारत सरकार के दृढ़ संकल्प तथा योगगुरु स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के युगांतरकारी प्रयासों से भारतीय शिक्षा व्यवस्था को एक नई और गौरवमयी दिशा देने हेतु भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी) ने एक ऐतिहासिक पहल की है। देश को आज़ादी मिले 75 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, किंतु दुर्भाग्यवश देश अब तक मैकाले की थोपी हुई शिक्षा पद्धति के औपनिवेशिक प्रभाव से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया था। इस मानसिक दासता को समूल नष्ट करने के उद्देश्य से अब भारतीय शिक्षा बोर्ड ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सर्वथा अनुरूप नई शिक्षा व्यवस्था को धरातल पर उतारकर इस दिशा में अत्यंत क्रांतिकारी एवं बड़ा कदम उठाया है।
भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी) ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बालवाटिका से लेकर माध्यमिक स्तर तक विद्यालयी शिक्षा के सभी चरणों में राष्ट्रीय पाठ्य चर्चा रूपरेखा-विद्यालयी शिक्षा 2023 (एनसीएफ 2023) तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा रूपरेखा आधारभूत स्तर 2022 (एनसीएफ-एफएस 2022) को पूर्णतः लागू करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस युगांतरकारी निर्णय के साथ ही बीएसबी संपूर्ण देश का ऐसा पहला विद्यालयी बोर्ड बन गया है, जिसने अपने संपूर्ण विद्यालयी शिक्षा क्रम में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा का इतना व्यापक, सुदृढ़ और समग्र कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का गौरव प्राप्त किया है।
बीएसबी की यह अभूतपूर्व पहल वर्षों से चली आ रही रटंत शिक्षा पद्धति की बेड़ियों को तोड़कर आगे बढ़ते हुए दक्षता आधारित, अनुभवात्मक एवं समग्र शिक्षा व्यवस्था की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है। इस बोर्ड से संबद्धता प्राप्त सभी विद्यालय अब शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों, बहुभाषीय शिक्षा दृष्टिकोण तथा विद्यार्थियों के विभिन्न आयु-स्तरों के बिल्कुल अनुकूल तैयार की गई पाठ्यचर्या संरचना को अनिवार्य रूप से अपनाएंगे। इस आमूलचूल परिवर्तन से विद्यार्थियों में केवल सैद्धांतिक किताबी ज्ञान का संचार ही नहीं होगा, बल्कि उनमें व्यावहारिक जीवन में उस ज्ञान का विवेकपूर्ण उपयोग करने की वास्तविक क्षमता भी प्रखरता से विकसित होगी।
देश के प्रख्यात शिक्षा विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि विशुद्ध रूप से भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और उच्च मानवीय जीवन मूल्यों पर आधारित यह नवीन शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों के सर्वांगीण व बहुआयामी विकास को सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके साथ ही यह संपूर्ण राष्ट्र को आत्मनिर्भर, सशक्त और वैश्विक स्तर पर एक सुदृढ़ ज्ञा

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