कौन है वो दो मुसलमान जिन्होंने बीजेपी के लहर होते हुए भी बंगाल में लहराया कांग्रेस का परचम ?
पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर इतिहास रचा, वहीं कांग्रेस ने फरक्का और रानीनगर सीटों पर जीत के साथ 2026 में अपना खाता खोला।

नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, जहां बंगाल चुनाव 2026 के नतीजों में पार्टी के दो सीटों पर वापसी पर चर्चा की गई।
West Bengal Election Results : : पश्चिम बंगाल की राजनीतिक बिसात पर साल 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों ने एक ऐसी इबारत लिख दी है, जिसने राज्य के तीन दशक पुराने समीकरणों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। 'मां, माटी, मानुष' का नारा देने वाली ममता बनर्जी के 15 साल के अभेद्य दुर्ग को ढहाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक 207 सीटों के साथ सत्ता के गलियारों में अपनी धमक दर्ज की है। जहां एक ओर तृणमूल कांग्रेस महज 80 सीटों पर सिमट कर रह गई, वहीं इस भीषण राजनीतिक सुनामी के बीच भी कांग्रेस के दो योद्धाओं ने वह कर दिखाया जो नामुमकिन लग रहा था।
कांग्रेस के दो 'सिकंदर' : जब शून्य से शुरू हुआ सफर
पिछले विधानसभा चुनाव में शून्य पर रहने वाली कांग्रेस के लिए यह चुनाव किसी संजीवनी से कम नहीं रहा। भाजपा की प्रचंड लहर के बावजूद मुस्लिम बहुल सीटों पर कांग्रेस ने न केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, बल्कि दो महत्वपूर्ण सीटों पर जीत हासिल कर बंगाल में अपनी वापसी का बिगुल फूंक दिया।
फरक्का सीट (मुर्शिदाबाद): यहां कांग्रेस के मोताब शेख ने एक रोमांचक मुकाबले में जीत का परचम लहराया। मोताब शेख ने भाजपा के सुनील चौधरी को 8,000 से अधिक मतों के अंतर से करारी शिकस्त दी। आंकड़ों के मुताबिक, सुनील चौधरी को 54,857 वोट मिले, जबकि टीएमसी के निवर्तमान विधायक अमिरुल इस्लाम 47,256 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर खिसक गए।
रानीनगर सीट: यहां कांग्रेस के जुल्फीकार अली ने कड़ी मशक्कत के बाद जीत हासिल की। उन्होंने टीएमसी के दिग्गज अब्दुल सौमिक हुसैन को 2,701 वोटों के मामूली अंतर से हराया। जुल्फीकार अली को कुल 79,423 वोट मिले, जबकि सौमिक को 76,722 वोटों से संतोष करना पड़ा। इस सीट पर वामपंथियों की स्थिति भी कमजोर दिखी, जहां सीपीआईएम के जमल हुसैन 48,587 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
अधीर रंजन की हार और बदलता समीकरण :
इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला पहलू कांग्रेस के कद्दावर नेता अधीर रंजन चौधरी की हार रही। बहरामपुर के अपने गढ़ में चुनाव लड़ रहे अधीर रंजन को 73,540 वोट मिले, लेकिन भाजपा के सुब्रत ने यहां जीत दर्ज कर कांग्रेस के इस सबसे बड़े चेहरे को शिकस्त दे दी। हालांकि, नतीजों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि मुस्लिम बहुल इलाकों में कांग्रेस का प्रदर्शन पहले से बेहतर रहा है। कांग्रेस ने कई सीटों पर तृणमूल कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाई, जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिला और टीएमसी के कई उम्मीदवार हार की दहलीज पर पहुंच गए।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
