संदेहास्पद धमाके से कांपा बारामूला; गुलमर्ग के पास जिंदा शेल फटने से मचा हड़कंप
उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले में नियंत्रण रेखा के करीब स्थित आशा पोस्ट के पास जमीन में दबा पुराना तोपखाना शेल फटने से स्थानीय ग्रामीण की मौके पर ही जान चली गई।

उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले के गुलमर्ग सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास आशा पोस्ट क्षेत्र की पहाड़ी पर शनिवार को पुराना जिंदा सैन्य शेल फटने से हुए विस्फोट का सांकेतिक दृश्य।
Gulmarg LoC Blast 2026 : उत्तर कश्मीर के अशांत और संवेदनशील बारामूला जिले से एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे की खबर सामने आई है। शनिवार की दोपहर जब पूरा गुलमर्ग इलाका अपनी प्राकृतिक शांति में मग्न था, तभी लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के अग्रिम क्षेत्र में हुए एक भीषण और रहस्यमयी धमाके ने पूरी घाटी को कपां दिया। सीमा पर पसरी खामोशी को चीरते हुए हुए इस जोरदार ब्लास्ट की चपेट में आने से एक स्थानीय नागरिक की मौके पर ही क्षत-विक्षत लाश मिली। सैन्य और प्रशासनिक अधिकारियों से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह खौफनाक हादसा सीमा के बेहद करीब जमीन पर लावारिस हालत में पड़े एक पुराने जिंदा सैन्य शेल (Unexploded Shell) के अचानक फटने की वजह से हुआ है, जिसने एक बार फिर सीमावर्ती इलाकों में छिपे मौत के अदृश्य खतरों को उजागर कर दिया है।
शुरुआती जमीनी रिपोर्ट्स और समाचार एजेंसी केएनओ के हवाले से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, यह दिल दहला देने वाली घटना शनिवार दोपहर को गुलमर्ग के पास रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'सुमली वाली ढोक' इलाके में स्थित 'आशा पोस्ट' के ठीक करीब घटित हुई। अग्रिम सीमा चौकी के पास निर्जन पहाड़ी ढलान पर एक पुराना बिना फटा हुआ तोप या मोर्टार का शेल पड़ा हुआ था। शनिवार दोपहर किसी अज्ञात बाहरी दबाव या घर्षण की वजह से यह घातक गोला अचानक पूरी तरह एक्टिव हो गया और इसके भीतर मौजूद बारूद ने एक भयानक नरसंहार को अंजाम दे दिया। धमाका इतना भीषण और तीव्र था कि आसपास के कई किलोमीटर के दायरे में इसकी गूंज सुनी गई और वहां मौजूद स्थानीय नागरिक को संभलने या अपनी जान बचाने के लिए भागने तक का एक सेकंड का मौका नहीं मिला।
इस दर्दनाक हादसे में असमय काल के गाल में समाने वाले बदनसीब शख्स की पहचान बारामूला जिले के चांदूसा इलाके के अंतर्गत आने वाले गलीबल निवासी जाबिर अहमद बजाद के रूप में हुई है, जो मोहम्मद रफीक बजाद के पुत्र थे। जाबिर रोजमर्रा की तरह सीमा के पास पहाड़ी इलाके में गए थे, जहां जमीन में छुपा यह शेल उनका आखिरी काल साबित हुआ। इस अचानक और अप्रत्याशित वज्रपात के बाद जाबिर के पैतृक गांव में कोहराम मच गया है, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे बारामूला जिले में इस समय गहरे शोक और सन्नाटे की लहर दौड़ गई है।
कानूनी और सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से देखें तो घटना की भयावहता को देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन, सेना के उच्च अधिकारी और अन्य खुफिया व सुरक्षा एजेंसियां भारी दलबल के साथ तुरंत मौके पर पहुंच गईं। सुरक्षा बलों ने बिना वक्त गंवाए पूरे 'सुमली वाली ढोक' और 'आशा पोस्ट' के आसपास के संवेदनशील इलाके को चारों तरफ से घेरकर एक सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। फॉरेंसिक और सैन्य विशेषज्ञों की टीम यह पता लगाने के लिए गहन तकनीकी जांच कर रही है कि यह अनफटा शेल किस दौर का था, किस सैन्य ऑपरेशन या गोलाबारी के दौरान यहां छूटा था और इसके अचानक फटने की असली वजह क्या रही। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए स्थानीय पुलिस थाने में इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है।
यह भीषण दुर्घटना इस बात का एक गंभीर और चिंताजनक प्रमाण है कि भारत-पाकिस्तान सीमा के अग्रिम इलाकों में दशकों पुरानी गोलाबारी के अवशेष आज भी आम नागरिकों के लिए कितने बड़े नासूर बने हुए हैं। अग्रिम क्षेत्रों में रहने वाले चरवाहे, लकड़हारे और आम ग्रामीण अक्सर अनजाने में इन अनफटे गोलों का शिकार बन जाते हैं। बारामूला का यह धमाका न केवल एक परिवार के चिराग को बुझा गया है, बल्कि यह सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों के बीच सुरक्षा और सतर्कता को लेकर एक नए खौफ और बड़ी बहस को जन्म दे गया है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
