छत्तीसगढ़ के बालोद जिले ने 2025 में इतिहास रचते हुए देश का पहला बाल विवाह-मुक्त जिला बनने का गौरव हासिल किया है। यह उपलब्धि सामाजिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो बच्चों के अधिकारों और उनके सुरक्षित भविष्य की दिशा में मजबूत संदेश देती है।

17 सितंबर 2025 को जिले के प्रशासन ने 75 ग्राम पंचायतों को औपचारिक रूप से “बाल विवाह-मुक्त पंचायत” घोषित किया। इस अवसर पर जिला प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने सामूहिक रूप से बाल विवाह की रोकथाम और बच्चों के अधिकारों के संरक्षण की प्रतिबद्धता दोहराई। बालोद जिले की यह पहल देशभर के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत यह लक्ष्य रखा गया है कि 2026 तक बाल विवाह की घटनाओं में 10% की कमी लायी जाए और 2030 तक देश को पूरी तरह बाल विवाह-मुक्त बनाया जाए। यह अभियान उन सामाजिक और कानूनी चुनौतियों से निपटने का प्रयास है, जिनसे लाखों युवा लड़कियां और लड़के प्रतिदिन प्रभावित होते हैं।

बाल विवाह, जो भारतीय कानून के तहत स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित है, अब भी देश में व्यापक सामाजिक समस्या के रूप में मौजूद है। इससे न केवल लड़कियों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, खासकर प्रीमैच्योर गर्भधारण से जुड़े जोखिम, बल्कि घरेलू हिंसा और गरीबी के चक्र को भी बढ़ावा मिलता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019–21) के अनुसार, भारत में 23% महिलाएं 20–24 वर्ष की आयु में 18 वर्ष की आयु से पहले विवाह कर चुकी हैं। यह आंकड़ा बाल विवाह को न केवल एक सामाजिक चुनौती, बल्कि एक गंभीर अपराध भी बनाता है।

देश के कुछ राज्य जैसे पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार में बाल विवाह की घटनाएं सबसे अधिक पाई जाती हैं, लेकिन देश के अन्य हिस्सों में भी समय-समय पर इसके मामले सामने आते रहते हैं। छत्तीसगढ़ का यह कदम ऐसे राज्यों के लिए भी उदाहरण प्रस्तुत करता है कि कानूनी प्रावधानों और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से इस कुप्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।

जिला प्रशासन की ओर से बाल विवाह को रोकने के लिए विभिन्न उपाय किए गए हैं, जिनमें समुदाय के लोगों को संवेदनशील करना, स्थानीय पंचायतों को सक्रिय करना और युवा लड़कियों की शिक्षा एवं सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना शामिल है। इस पहल से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि बाल विवाह सिर्फ कानून से नहीं, बल्कि समाज के सहयोग और जागरूकता से ही पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।

बालोद जिले की यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह दर्शाता है कि अगर समाज और प्रशासन मिलकर प्रयास करें, तो बाल विवाह जैसी गहरी जड़ों वाली सामाजिक कुप्रथा को समाप्त किया जा सकता है। बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए यह एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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