आखिर क्यों आजम खान को मिली 2 साल की सजा ? जानें क्या है पूरा मामला..
रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट ने विवादित बयान मामले में सपा नेता आजम खान को 2 साल की सजा और 20 हजार जुर्माना सुनाया है। उन्होंने अफसरों को 'तनखैया' कहा था।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान
Azam Khan in Rampur MP MLA Court : समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अपने तल्ख और विवादित बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले आजम खान को अदालत से एक और बड़ा झटका लगा है। उत्तर प्रदेश स्थित रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने करीब 7 साल पुराने एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आजम खान को दोषी करार दिया है और उन्हें 2 साल के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर 20 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। अधिकारियों पर की गई अमर्यादित टिप्पणी का यह मामला अब आजम खान के राजनीतिक और कानूनी सफर में एक और बड़ा दाग बन गया है।
यह पूरा विवाद साल 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान का है। रामपुर में आयोजित एक चुनावी रोड शो के दौरान आजम खान ने प्रशासनिक अधिकारियों को निशाने पर लेते हुए बेहद आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणी की थी। उस वक्त उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हुआ था, जिसने प्रशासनिक अमले और राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था। वायरल वीडियो में आजम खान जनसभा को संबोधित करते हुए साफ कह रहे थे, "सब डटे रहो, ये कलेक्टर-पलेक्टर से मत डरीयो, ये तनखइया हैं, तनखाइयों से नहीं डरते।"
बात सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रही, आजम खान ने मंच से हुंकार भरते हुए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती के शासनकाल का भी जिक्र किया था। उन्होंने विवादित लहजे में कहा था कि "मायावती जी के शासनकाल में बड़े-बड़े अफसर जूते साफ करते नजर आए थे।" इसके आगे उन्होंने सीधे तौर पर अधिकारियों को धमकाते हुए कहा था कि चुनाव खत्म होने के बाद वे इन अधिकारियों से जूते साफ करवाएंगे। इस बयान के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और चुनाव आयोग ने इसे बेहद गंभीरता से लिया था।
इस भड़काऊ भाषण और अमर्यादित भाषा को लेकर आजम खान के खिलाफ चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन और सरकारी अधिकारियों को डराने-धमकाने की धाराओं के तहत शिकायत दर्ज की गई थी। रामपुर के भोट थाने में पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर तफ्तीश शुरू की और पुख्ता सबूतों के साथ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। लंबे समय तक रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में इस हाई-प्रोफाइल मामले की कानूनी लड़ाई चली, जिसमें दोनों पक्षों की दलीलें और गवाहियां सुनने के बाद आखिरकार अदालत ने आजम खान को दोषी ठहराते हुए सजा का ऐलान कर दिया।
अदालत का यह फैसला उस वक्त आया है जब आजम खान पहले से ही कई अन्य आपराधिक मामलों में रामपुर जेल में बंद हैं। इस नई सजा ने उनकी कानूनी और राजनीतिक राह को और अधिक कांटों भरा बना दिया है। राजनीति में जुबान पर नियंत्रण और प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमा को लेकर आए कोर्ट के इस कड़े फैसले को एक बड़े नजीर के रूप में देखा जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की सियासत पर पड़ना तय है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
