Assam Assembly Elections 2026 की दहलीज पर खड़े राज्य में एक विवादित एआई (AI) जनित वीडियो ने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुँचा दिया है। असम भाजपा द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को कथित तौर पर एक विशिष्ट समुदाय के प्रति आक्रामक मुद्रा में दिखाए जाने के बाद न केवल विवाद खड़ा हुआ, बल्कि विपक्षी दलों ने इसे 'लोकतंत्र की हत्या' और 'नरसंहार का आह्वान' तक करार दे दिया है। यद्यपि भारी विरोध के बाद भाजपा ने इस वीडियो को अपने आधिकारिक हैंडल से हटा लिया है, लेकिन इसकी गूँज अब अदालतों और चुनाव आयोग के दरवाजों तक पहुँचती दिख रही है।

क्या था वीडियो में ? 'पॉइंट ब्लैंक शॉट' का विवाद

यह विवाद शनिवार को तब शुरू हुआ जब भाजपा ने 'पॉइंट ब्लैंक शॉट' कैप्शन के साथ एक एनिमेटेड वीडियो अपलोड किया। इस वीडियो के दृश्य किसी फिल्म की भांति सनसनीखेज थे:

  • वीडियो का चित्रण: इसमें मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को काउबॉय के कपड़ों में एक बंदूकधारी के रूप में दिखाया गया है, जो टोपी पहने दो व्यक्तियों की तस्वीरों पर निशाना साध रहे हैं।
  • विवादास्पद नारे: वीडियो के अंत में "बांग्लादेशियों पर कोई दया नहीं", "तुम पाकिस्तान क्यों गए?" और "विदेशी मुक्त असम" जैसे तीखे स्लोगन फ्लैश हो रहे थे।
  • संदेश: वीडियो में विदेशी घुसपैठियों के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति को बेहद आक्रामक शैली में पेश किया गया था।
  • विपक्ष का तीखा हमला: 'फासीवाद का असली चेहरा'
  • कांग्रेस, टीएमसी और सीपीआई(एम) ने एकजुट होकर इस वीडियो की निंदा की है। कांग्रेस ने इसे केवल एक 'ट्रोल कंटेंट' मानने से इनकार करते हुए इसे भाजपा की गहरी नफरत वाली राजनीति का हिस्सा बताया है।
  • कांग्रेस की प्रतिक्रिया: पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इसे 'सामूहिक हत्यारों' की मानसिकता करार देते हुए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने न्यायपालिका से हस्तक्षेप की मांग करते हुए सवाल किया कि क्या संस्थाएं इस नफरत पर सो रही हैं?
  • टीएमसी का पक्ष: ममता बनर्जी की पार्टी ने इसे 'नरसंहार के लिए हरी झंडी' बताया और कहा कि भाजपा ने भारत की राजनीतिक चर्चा को गटर में धकेल दिया है।
  • वामपंथी दलों का रुख: सीपीआई(एम) ने वीडियो को 'जातीय सफाई' (Ethnic Cleansing) का खुला आह्वान बताया, जो राज्य की धर्मनिरपेक्ष संरचना के लिए खतरा है।

कानूनी और नैतिक संकट : चुनावी माहौल में तनाव

चुनाव से ठीक पहले इस तरह के वीडियो का आना कानूनी पेचीदगियों को भी जन्म देता है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से मांग की है कि इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश माना जाए। हालांकि भाजपा की ओर से आधिकारिक तौर पर वीडियो हटाने के पीछे का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते दबाव और कानूनी कार्रवाई के डर से यह कदम उठाया गया है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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