बिहार में आर्या.एजी-रीगाल साझेदारी से मक्का खरीद को मिली नई मजबूती, 3 करोड़ रुपये की खरीद पूरी
बिहार के सीमांचल में आर्या.एजी और रीगाल की साझेदारी से 3 करोड़ रुपये से अधिक की मक्का खरीद पूरी हुई। जानिए कैसे एफपीओ और किसानों को मिला इसका लाभ।

स्वीर में सीमांचल क्षेत्र में एक बांस-फूस की शेड के नीचे पारंपरिक परिधानों में बैठी महिलाएं समूह चर्चा या बैठक करती हुई दिखाई दे रही हैं।
बिहार के सीमांचल क्षेत्र में मक्का खरीद सीजन के दौरान आर्या.एजी की फील्ड टीम ने 3 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की खरीद पूरी कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि सीजन के सबसे व्यस्त दौर में भी फार्मगेट स्तर पर बेहतर योजना और मजबूत समन्वय के साथ खरीद प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता है।
आर्या एग्री वैल्यू रिसोर्स सेंटर्स (एवीआरसी) और फील्ड टीमों के नेटवर्क के माध्यम से आर्या.एजी ने बिहार के 20 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को सहयोग प्रदान किया। इस पहल के तहत स्थानीय मक्का उत्पादकों को रीगाल से जोड़ा गया, जिससे किसानों और खरीदार के बीच खरीद प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से संचालित किया जा सका।
किसानों को जोड़ने से लेकर मक्का के एकत्रीकरण, गुणवत्ता जांच और डिस्पैच तक आर्या.एजी की टीमों ने एफपीओ, सीवीआरपीज़ और खरीदार प्रतिनिधियों के साथ मिलकर पूरी प्रक्रिया को सफल बनाया। इसका उद्देश्य फार्मगेट से रीगाल तक उपज की आवाजाही को समयबद्ध और सुचारु बनाए रखना था।
एवीआरसीज़ के माध्यम से किसानों को संगठित किया गया, एफपीओ के जरिए मक्का के एकत्रीकरण में सहयोग दिया गया और किसानों को खरीदारों की गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं की जानकारी उपलब्ध कराई गई। इसके साथ ही किसानों को मक्का को सही तरीके से सुखाने का मार्गदर्शन दिया गया, नमी के स्तर की निगरानी की गई तथा डिस्पैच से पहले गुणवत्ता जांच में भी सहयोग किया गया।
आर्या.एजी के निरंतर सहयोग से किसानों में फसल कटाई के बाद बेहतर प्रबंधन को लेकर समझ विकसित हुई। इससे किसान उत्पादक संगठनों को औपचारिक खरीद प्रक्रिया में प्रभावी रूप से भाग लेने में भी मदद मिली।
आर्या.एजी के चीफ बिजनेस ऑफिसर रितेश रमन ने कहा, “बिहार का मक्का उत्पादक क्षेत्र भारत की ग्रेन वैल्यू चेन में तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और छोटे किसानों के लिए संगठित खरीद व्यवस्था भरोसेमंद संस्थागत बाजारों तक बेहतर पहुँच स्थापित कर सकती है। स्थानीय स्तर पर एकत्रीकरण, किसानों में गुणवत्ता संबंधी जागरूकता, गुणवत्ता पर आधारित प्रक्रियाएँ और खरीदारों से मजबूत जुड़ाव, मिलकर फार्मगेट स्तर पर किसानों के लिए अधिक मूल्य सृजित कर सकते हैं। यह उपलब्धि इसी का प्रमाण है।”
उन्होंने कहा कि पीक सीजन के दौरान फील्ड टीमों के लिए खरीद प्रक्रिया केवल उपज खरीदने तक सीमित नहीं रहती। इसमें किसानों, सीवीआरपीज़, एफपीओ प्रतिनिधियों, श्रमिकों, ट्रांसपोर्टर्स और खरीदार टीमों के बीच लगातार समन्वय की आवश्यकता होती है। हर ट्रक की आवाजाही समय पर मक्का के एकत्रीकरण, गुणवत्ता जांच, आवश्यक दस्तावेज तैयार करने और रूट प्लानिंग पर निर्भर करती है।
इस सीजन में गुणवत्ता संबंधी जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया गया। अलग-अलग खरीद केंद्रों से मक्का आने के कारण टीम ने किसानों और एफपीओ के साथ मिलकर मक्का को सही तरीके से सुखाने, नमी प्रबंधन और खरीदारों की गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए मार्गदर्शन दिया। इन प्रयासों से खरीद प्रक्रिया में अनुशासन मजबूत हुआ और खरीदारों का भरोसा भी बढ़ा।
उपज संग्रह, गुणवत्ता जांच, भंडारण, लॉजिस्टिक्स, वित्त और संस्थागत बाजारों तक पहुँच को एक साथ जोड़ते हुए आर्या.एजी का पोस्ट-हार्वेस्ट इकोसिस्टम किसानों के लिए एक समग्र व्यवस्था उपलब्ध कराता है। बिहार में इस मॉडल के माध्यम से एफपीओ को औपचारिक कृषि बाजारों से अधिक आत्मविश्वास के साथ जुड़ने में मदद मिली, जबकि रीगाल को अधिक व्यवस्थित खरीद प्रक्रिया के जरिए एकत्रित मक्का तक पहुँच प्राप्त हुई।
यह पहल किसानों को सीधे प्रोसेसर से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रोसेसर के लिए भी अधिक मूल्य सृजित होता है। मक्का के स्रोत की पहचान होने से प्रोसेसर अपने कच्चे माल की आपूर्ति को बेहतर तरीके से प्रबंधित कर सकता है और आवश्यक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पादन सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है।
रीगाल रिसोर्सेज के प्रोक्योरमेंट हेड विवेक लिल्हा ने कहा, “खरीद अवधि के दौरान प्रोसेसर्स के लिए भरोसेमंद कच्चे माल की सोर्सिंग बहुत जरूरी होती है। आर्या.एजी के साथ हमारी साझेदारी से मक्का खरीद प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हुई। संगठित तरीके से उपज जुटाने, गुणवत्ता जांच, डिस्पैच योजना और फार्मगेट स्तर पर एफपीओ के साथ बेहतर समन्वय से खरीद प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनी। गुणवत्ता मानकों पर स्पष्टता और उपज की बेहतर ट्रेसबिलिटी से हमें सोर्सिंग पर बेहतर नियंत्रण मिला और हमारी उत्पादन आवश्यकताओं के अनुरूप खरीद को संचालित करने में मदद मिली।”

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