2025 में भारत की जासूसी के लिए हुई थी गिरफ्तारी ; ज्योति मल्होत्रा केस में आया नया पड़ाव, जानें कोर्ट का नया फैसला
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोपों में गिरफ्तार ट्रैवल व्लॉगर ज्योति रानी मल्होत्रा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोपों और प्रारंभिक साक्ष्यों का हवाला देते हुए राहत देने से इनकार किया।

ट्रैवल व्लॉगर ज्योति रानी मल्होत्रा
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक गंभीर मामले में Punjab and Haryana High Court ने ट्रैवल व्लॉगर ज्योति रानी मल्होत्रा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने 7 मार्च 2026 को दिए अपने आदेश में कहा कि मामले में उपलब्ध प्रारंभिक साक्ष्य और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए इस चरण पर आरोपी को जमानत देना उचित नहीं होगा।
जांच एजेंसियों के अनुसार, 33 वर्षीय ज्योति रानी मल्होत्रा पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों से जुड़े लोगों को भारत के संवेदनशील स्थानों से संबंधित तस्वीरें और वीडियो साझा करने का आरोप है। अदालत ने अपने आदेश में यह भी माना कि उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी की गतिविधियाँ देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं।
ज्योति को 16 मई 2025 को हरियाणा के हिसार से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस और जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह पाकिस्तान से जुड़े कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क में थीं और उनके साथ लगातार संवाद कर रही थीं। मल्होत्रा सोशल मीडिया पर एक ट्रैवल व्लॉगर के रूप में सक्रिय थीं और “Travel with Jo” नाम से यूट्यूब चैनल चलाती थीं, जिसके हजारों-लाखों दर्शक थे। इसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से वह विभिन्न स्थानों की यात्रा से जुड़े वीडियो और तस्वीरें साझा करती थीं। जांच के दौरान सामने आया कि उनके कुछ वीडियो और फोटो ऐसे स्थानों से जुड़े थे जिन्हें सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। आरोप है कि इन सामग्रियों को उन्होंने मैसेजिंग एप्स के जरिए संदिग्ध संपर्कों को भेजा।
किन कानूनों के तहत दर्ज हुआ मामला:
इस मामले में पुलिस ने मल्होत्रा के खिलाफ कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- Official Secrets Act, 1923 की धारा 3 और 5
- Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 152
इन धाराओं के तहत किसी भी व्यक्ति पर देश की संप्रभुता और सुरक्षा को खतरे में डालने वाली गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया जा सकता है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो इन अपराधों के लिए कठोर सजा का प्रावधान है।
जांच एजेंसियों के आरोप:
जांच एजेंसियों का दावा है कि मल्होत्रा की बातचीत पाकिस्तान से जुड़े कुछ संदिग्ध लोगों से हुई थी। पुलिस के अनुसार, वह एहसान‑ऊर‑रहीम नामक व्यक्ति के संपर्क में थीं, जो नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन में कार्यरत था और बाद में भारत सरकार द्वारा निष्कासित कर दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि मल्होत्रा ने पाकिस्तान की कई यात्राएँ की थीं और इस दौरान उनकी बातचीत ऐसे व्यक्तियों से हुई जिनका संबंध पाकिस्तानी खुफिया तंत्र से जोड़ा जा रहा है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि उन्होंने कई संवेदनशील स्थानों जैसे बुनियादी ढांचे और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया एप्स जैसे व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए साझा किए। इसके अलावा, उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त चैट और डिजिटल डेटा को भी अभियोजन पक्ष ने अदालत में प्रारंभिक साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया है।
अदालत ने क्यों खारिज की जमानत:
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला साधारण आपराधिक आरोपों से कहीं अधिक गंभीर है। अदालत के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की गतिविधियाँ देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ी हों, तो जमानत देने के निर्णय में विशेष सावधानी बरतनी आवश्यक होती है। अदालत ने कहा कि उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और आरोपी के कथित बयान इस बात की ओर संकेत करते हैं कि मामले में आगे गहन जांच और न्यायिक प्रक्रिया आवश्यक है। इसी आधार पर अदालत ने फिलहाल जमानत देने से इनकार कर दिया।
बचाव पक्ष की दलील:
दूसरी ओर, मल्होत्रा के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं। उनका कहना है कि जिन स्थानों की तस्वीरें और वीडियो साझा करने की बात कही जा रही है, वे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्थान हैं। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि पंडोह डैम जैसे स्थान प्रतिबंधित क्षेत्र नहीं हैं और वहां से ली गई तस्वीरें या वीडियो सार्वजनिक मंचों पर पहले से मौजूद हैं। वकीलों ने पूरे मामले को “काल्पनिक कहानी” बताते हुए कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की गोपनीय सैन्य जानकारी साझा करने का ठोस प्रमाण नहीं है।
फिलहाल अदालत के इस फैसले के बाद ज्योति रानी मल्होत्रा न्यायिक हिरासत में ही रहेंगी। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है, और आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि आरोपों को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष कितना ठोस सबूत प्रस्तुत कर पाता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
