अन्ना हजारे 30 जनवरी से करेंगे अनशन; महाराष्ट्र में सशक्त लोकायुक्त कानून लागू न होने पर तीखा ऐलान
महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून लागू न होने पर समाजसेवी अन्ना हजारे ने 30 जनवरी 2026 से रालेगन सिद्धि में भूख हड़ताल का ऐलान किया है। CM को चिट्ठी भेजकर उन्होंने कहा कि कई बैठकों और आश्वासनों के बावजूद कानून लागू नहीं हुआ। 2011 के आंदोलन की याद दिलाता यह कदम राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है।

anna hazare bhukh hadtal 30 january 2026
anna hazare bhukh hadtal 30 january 2026 : महाराष्ट्र में सशक्त लोकायुक्त कानून लागू करवाने की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। समाजसेवी अन्ना हजारे ने 30 जनवरी 2026 से भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान कर राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। रालेगन सिद्धि में होने वाला यह अनशन न केवल राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है, बल्कि लोकायुक्त कानून की अधूरी प्रक्रिया पर भी सवाल उठा रहा है।
अन्ना हजारे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजी गई चिट्ठी में स्पष्ट लिखा है कि वे महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के दिन आमरण अनशन पर बैठेंगे। उनका कहना है कि महाराष्ट्र सरकार ने लोकायुक्त बिल को भले ही विधानमंडल से पारित करा लिया हो, लेकिन उसे लागू करने में अब तक अनावश्यक देरी की गई है। उन्होंने याद दिलाया कि 28 दिसंबर 2022 को विधानसभा और 15 दिसंबर 2023 को विधान परिषद से लोकायुक्त कानून पारित हुआ था, परन्तु दो वर्ष बीतने के बाद भी इसे अमल में नहीं लाया गया।
अन्ना हजारे ने आरोप लगाया कि सरकार के साथ कई बार बैठकों के बावजूद केवल आश्वासन मिले, कार्यान्वयन नहीं। उन्होंने कहा कि देश कानून से चलता है और राज्य में एक मजबूत लोकायुक्त व्यवस्था की आवश्यकता अत्यंत जरूरी है। अपनी दृढ़ स्थिति को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि यदि राज्य में सशक्त लोकायुक्त कानून लागू नहीं किया गया, तो जीवन जीने की इच्छा भी शेष नहीं रहेगी।
उन्होंने आगे कहा कि उनका संपूर्ण जीवन समाज और देशहित के लिए समर्पित रहा है। स्वयं के लिए कुछ न रखने वाले अन्ना हजारे ने दोहराया कि जब तक प्राण हैं, वे जनता की भलाई के लिए कार्य करते रहेंगे। गांधीवादी विचारों से प्रेरित अन्ना का कहना है कि महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर शुरू होने वाला यह अनशन उनके आदर्शों को समर्पित होगा और कानून लागू होने तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
गौरतलब है कि अन्ना हजारे ने 2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का नेतृत्व किया था, जिसने जन लोकपाल बिल की मांग को राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना दिया था। रामलीला मैदान का वह ऐतिहासिक अनशन भारतीय राजनीति में एक नई जनभागीदारी की शुरुआत माना गया था। अब एक बार फिर अन्ना का यह कदम राज्य सरकार को कठिन स्थिति में डाल सकता है और लोकायुक्त कानून के भविष्य पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
