गुजरात के भव्य शत्रुंजय पहाड़ पर रविवार की सुबह असामान्य दृश्य देखने को मिला, जिसने सैकड़ों तीर्थयात्रियों की धड़कनों को बढ़ा दिया। एक जंगली एशियाटिक शेर को शत्रुंजय पहाड़ की सीढ़ियों पर चलते हुए देखा गया यह क्षेत्र जैन धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों की ओर जाने वाला मार्ग है और यहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

सुबह के शुरुआती समय में जब तीर्थयात्री अपने धार्मिक कर्तव्यों में व्यस्त थे, तभी अचानक एक विशालकाय शेर सीढ़ियों पर प्रकट हुआ। उपस्थित श्रद्धालु आश्चर्य और भय से हक्का-बक्का रह गए। कई लोगों ने अपनी जान की सुरक्षा के लिए भागने की कोशिश की, जबकि कुछ ने धर्म के मंत्रों का उच्चारण करते हुए शांति बनाए रखने का प्रयास किया। इस असामान्य दृश्य का वीडियो मोबाइल कैमरों में कैद हुआ और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

शेर का व्यवहार हालांकि आक्रामक नहीं था। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि शेर धीरे-धीरे सीढ़ियों पर चलता हुआ नीचे उतर रहा था, और आसपास मौजूद लोगों की उपस्थिति से प्रभावित नहीं हो रहा था। स्थानीय वन अधिकारियों ने इस दृश्य की पुष्टि की और बताया कि शत्रुंजय क्षेत्र गीर के आसपास के जंगलों से सटे होने के कारण शेरों के प्राकृतिक आवास का हिस्सा है।

स्थानीय वन विभाग ने तुरंत सुरक्षा प्रबंध लागू कर दिए। शेर के मार्ग में आने वाले सभी तीर्थयात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया और सीढ़ियों पर जाने वाली भीड़ को अस्थायी रूप से रोका गया। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे समय में धार्मिक आस्था और सुरक्षा दोनों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

गुजरात में एशियाटिक शेरों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे ये जानवर अक्सर मानव-निवास या तीर्थस्थलों के पास दिखाई देते हैं। शत्रुंजय पहाड़ पर यह घटना इस बात का संकेत है कि संरक्षण प्रयासों के बावजूद, वन्यजीवन और मानव गतिविधियों के बीच संपर्क बढ़ रहा है। वन अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे शेरों के संभावित मार्गों के पास सतर्क रहें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचित करें।

इस घटना ने न केवल तीर्थयात्रियों में भय और रोमांच का मिश्रण पैदा किया, बल्कि यह याद दिलाने का काम भी किया कि भारत में जंगली जीवन और मानव समुदाय का संतुलन कितना नाजुक है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसे मामलों को कम करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता होगी।

पालिताना के शत्रुंजय पहाड़ पर इस असामान्य और रोमांचक दृश्य ने साबित कर दिया कि जंगली जीवन कभी भी अप्रत्याशित रूप से मानव जीवन के करीब आ सकता है। यह घटना तीर्थयात्रियों के लिए एक चेतावनी भी है कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ वन्यजीवन की सुरक्षा और सतर्कता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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