लेह में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी शुरू; अमित शाह ने किया उद्घाटन
पिपरहवा स्तूप से प्राप्त भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेषों की पहली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी लेह के जीवत्सल में आम जनता के लिए निशुल्क खोली गई।

लेह के जीवत्सल में भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेषों की प्रदर्शनी के उद्घाटन के दौरान संबोधित करते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह।
Amit Shah Leh Ladakh visit 2026 : हिमालय की गोद में बसे लद्दाख की शांत वादियों में आज एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अध्याय का सूत्रपात हुआ है। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लेह के जीवत्सल में भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेषों की पहली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन किया। 'शांति सीमाओं से परे' (Peace Beyond Borders) के प्रेरणादायी विषय के साथ आयोजित यह प्रदर्शनी न केवल भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत को प्रदर्शित करती है, बल्कि वैश्विक शांति और सांस्कृतिक कूटनीति के एक नए युग का संकेत भी देती है।
इस प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण भगवान बुद्ध के वे पवित्र अस्थि अवशेष हैं, जिन्हें वर्ष 1898 में पिपरहवा स्तूप की खुदाई के दौरान खोजा गया था। संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित यह आयोजन लद्दाख के सांस्कृतिक इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। इन अवशेषों की यात्रा अत्यंत गरिमामय रही, जिन्हें भारतीय वायु सेना के विशेष विमान के माध्यम से पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ लेह पहुँचाया गया। शुक्रवार से शुरू हुई यह प्रदर्शनी 14 मई तक आम जनता के लिए पूरी तरह निशुल्क खुली रहेगी, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के साक्षात् प्रतीक के दर्शन करने का दुर्लभ अवसर प्राप्त होगा।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए अमित शाह ने क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में आए क्रांतिकारी बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि 75 वर्ष पूर्व लद्दाख की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ऐसे आयोजन और श्रद्धालुओं की पहुँच लगभग असंभव थी, किंतु आज बेहतर सड़कों और आधुनिक संचार व्यवस्था ने इस आध्यात्मिक जुड़ाव को सर्वसुलभ बना दिया है। गृह मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह प्रदर्शनी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह सीमाओं के पार शांति का संदेश फैलाने और दुनिया के साथ भारत के आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करने का एक सशक्त माध्यम है।
Addressing the first international exposition of the sacred relics of Lord Buddha in Ladakh. https://t.co/QC09TfrSIx
— Amit Shah (@AmitShah) May 1, 2026
लद्दाख के बौद्ध विरासत को वैश्विक पटल पर रखने वाला यह आयोजन 14 मई को संपन्न होगा, लेकिन इसका प्रभाव लंबे समय तक महसूस किया जाएगा। यह प्रदर्शनी स्पष्ट करती है कि किस प्रकार प्राचीन विरासत और आधुनिक कूटनीति का संगम एक स्थिर और शांत विश्व की नींव रख सकता है। भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों की उपस्थिति ने लेह को एक वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है, जो आने वाले समय में सांस्कृतिक पर्यटन और धार्मिक सद्भाव की नई मिसाल पेश करेगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
