अमित शाह ने किया 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2' का शुभारंभ; जानें भारत के लिए कैसे फायदेमंद होगा यह प्रकल्प
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और श्रीगंगानगर के 184 गांवों में 4जी नेटवर्क, सड़क और बिजली बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की शुरुआत की।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राजस्थान में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 के शुभारंभ के अवसर पर एक जनसभा को संबोधित कर रहे हैं।
Amit Shah launch Vibrant Villages Programme 2 : भारत-पाकिस्तान की तपती अंतरराष्ट्रीय सीमा के साए में देश की सुरक्षा और सरहदी गांवों के विकास की एक नई और ऐतिहासिक इबारत लिखी जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राजस्थान के बीकानेर संभाग से सटे सीमावर्ती क्षेत्र से 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2' का आधिकारिक शुभारंभ कर दिया है। रणनीतिक और सामरिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले सीमांत इलाकों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और आधुनिक कनेक्टिविटी का जाल बिछाने की दिशा में केंद्र सरकार का यह अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी पहल के जरिए न केवल देश की आखिरी चौकियों तक विकास की मुख्यधारा पहुंचेगी, बल्कि सीमा पार की हर नापाक हरकत पर नजर रखने के लिए एक अभेद्य सुरक्षा तंत्र भी स्थापित होगा। इस कार्यक्रम की शुरुआत ने देश के रक्षा और राजनीतिक गलियारों में एक नया विमर्श छेड़ दिया है कि अब भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर कोई कसर बाकी नहीं रखने वाला है।
इस दो दिवसीय ऐतिहासिक दौरे के मुख्य एजेंडे के तहत राजस्थान के चार प्रमुख सीमावर्ती जिलों—बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और श्रीगंगानगर के कुल 184 गांवों को विकास के इस महाअभियान के लिए चुना गया है। योजना के पहले चरण के तहत इन सुदूर और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण गांवों को हर मौसम के अनुकूल पक्की सड़क कनेक्टिविटी, हाई-स्पीड 4जी मोबाइल नेटवर्क, चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति और टेलीविजन नेटवर्क की पहुंच से लैस किया जाएगा। गृह मंत्री सोमवार देर रात करीब 10:30 बजे एक विशेष विमान से बीकानेर के नल एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे थे, जहां राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने उनकी अगवानी की थी। इसके बाद प्रोटोकॉल की पारंपरिक भव्यता को दरकिनार कर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सादगी और न्यूनतम वीवीआईपी काफिले के निर्देश का पालन करते हुए गृह मंत्री सीधे सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के कैंप पहुंचे और वहीं रात्रि विश्राम किया, जो इस बात का संकेत है कि इस दौरे का पूरा ध्यान पूरी तरह से जमीनी सुरक्षा और ग्रामीण विकास पर केंद्रित है।
योजना के शुभारंभ के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सांचू सीमा चौकी (बीओपी) का दौरा किया। सांचू चौकी का अपना एक गौरवशाली इतिहास रहा है, जिसने 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और 1965 के संघर्ष के दौरान भारतीय जांबाजों ने पाकिस्तानी कब्जे से इस चौकी को वापस छीनकर अपनी वीरता का परचम लहराया था। गृह मंत्री ने इस ऐतिहासिक स्थल पर बने बीएसएफ के संग्रहालय का मुआयना कर सेना की शौर्य गाथाओं को नमन किया और साथ ही एक ऊंचे वॉचटावर पर चढ़कर दूर तक फैली अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अग्रिम मोर्चे पर तैनात बीएसएफ के जवानों और अधिकारियों से सीधा संवाद कर उनका हौसला बढ़ाया और अर्धसैनिक बलों के परिवारों के लिए चलाई जा रही कई नई कल्याणकारी योजनाओं का उद्घाटन भी किया।
आधिकारिक और प्रशासनिक मोर्चे पर इस दौरे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दोपहर दो बजे गृह मंत्री बीकानेर में एक अत्यंत उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने जा रहे हैं। इस बंद कमरे में होने वाली रणनीतिक बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ नीति निर्माताओं के साथ-साथ राजस्थान सरकार के शीर्ष अधिकारी, बीएसएफ के आला कमांडर और पाकिस्तान सीमा से सटे पांच सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारी (डीएम) व पुलिस अधीक्षक (एसपी) अनिवार्य रूप से शामिल होंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, तस्करी और ड्रोन गतिविधियों से निपटने के कानूनी व व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा करना और सुरक्षा बलों के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान को और अधिक तेज करना है।
केंद्रीय गृह मंत्री के इस सघन दौरे और 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2' के आगाज को देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़े आर्थिक व सामरिक संतुलन के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती गांवों से हो रहे पलायन को रोकने और वहां के नागरिकों को देश की रक्षा पंक्ति का पहला सिपाही बनाने की दिशा में यह परियोजना गेमचेंजर साबित होगी। इस मजबूत पहल के जरिए केंद्र सरकार ने यह साफ संदेश दे दिया है कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर स्थित देश का हर आखिरी गांव अब उपेक्षित नहीं रहेगा, बल्कि विकास और सुरक्षा के पैमाने पर देश की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहेगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
