अमरनाथ यात्रा: 'शिव ने मुझे बुलाया है', नेपाल के साधुओं का जत्था जम्मू में भक्ति भाव से हुआ शामिल
क्या भगवान शिव के बुलावे पर नेपाल के साधुओं ने शुरू की अमरनाथ यात्रा? जम्मू पहुंची टोली ने भारत-नेपाल के प्राचीन सभ्यतागत संबंधों की एक नई गाथा लिख दी है। सुरक्षा के कड़े पहरे और अटूट आस्था के बीच, जानें आखिर क्यों खास है यह यात्रा।

जम्मू के पुरानी मंडी स्थित राम मंदिर में नेपाल से आए साधु अमरनाथ यात्रा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए। ये साधु सदियों पुराने भारत-नेपाल संबंधों के प्रतीक हैं।
जम्मू की पुरानी मंडी स्थित राम मंदिर में इस वर्ष अमरनाथ यात्रा के दौरान एक अनूठा अंतरराष्ट्रीय दृश्य देखने को मिल रहा है, जहाँ नेपाल से आए साधुओं का भारी जत्था आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर रहा है। भगवान भोलेनाथ की भक्ति में लीन इन साधुओं के लिए यह यात्रा महज एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सदियों पुराने भारत-नेपाल सभ्यतागत संबंधों की एक जीवंत अभिव्यक्ति है। नेपाल के जनकपुरी से आए साधु विचारी दास सिद्धी ने भावुक होकर बताया कि उन्हें भगवान शिव ने स्वप्न में दर्शन देकर अमरनाथ आने का आदेश दिया था, जिसके बाद उन्होंने बिना समय गंवाए जम्मू-कश्मीर की ओर प्रस्थान किया।
इन साधुओं की यात्रा का मार्ग अत्यंत कठिन रहा है। इन्होंने दिनों तक कठिन सफर तय करते हुए बिहार सीमा से भारत में प्रवेश किया और तत्पश्चात ट्रेन के माध्यम से जम्मू पहुंचे। सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर देवनाथ दास ने अडिग विश्वास के साथ कहा कि जब बाबा भोलेनाथ स्वयं उनके साथ हैं, तो उन्हें किसी भी प्रकार का भय नहीं है। छोटा डूमी दास ने भारत और नेपाल के बीच के सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनों देशों की संस्कृति, सभ्यता और रीति-रिवाज एक समान हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत भगवान राम और भगवान शिव की भूमि है और भगवान शिव के ससुराल का संबंध नेपाल से रहा है, जो दोनों क्षेत्रों के बीच एक पवित्र बंधन को दर्शाता है।
प्रशासन द्वारा इन साधुओं सहित सभी तीर्थयात्रियों के लिए भोजन, आश्रय और चिकित्सा सहायता जैसी सुविधाओं का व्यापक प्रबंध किया गया है। बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे के बावजूद, इन साधुओं का संकल्प पूरी तरह अटूट है। अमरनाथ यात्रा का औपचारिक शुभारंभ 3 जुलाई को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा भगवती नगर आधार शिविर से किया जाएगा। नेपाल के इन साधुओं का यह आध्यात्मिक सफर न केवल उनकी व्यक्तिगत आस्था को दर्शाता है, बल्कि दो राष्ट्रों के बीच के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सेतु को भी और अधिक मजबूत करता है।

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