‘Made In India’ Airbus C-295 ने भरी सफल उड़ान ; रक्षा क्षेत्र में भारत को मिली बड़ी कामयाबी
भारत ने रक्षा विनिर्माण में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए वडोदरा में बने पहले स्वदेशी Airbus C-295 सैन्य परिवहन विमान की सफल परीक्षण उड़ान पूरी की। टाटा-एयरबस साझेदारी के तहत तैयार यह विमान 21,935 करोड़ रुपये की परियोजना का हिस्सा है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ व ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई मजबूती देता है।

स्वदेशी C-295 सैन्य परिवहन विमान
भारत ने रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिख दिया है। गुजरात के वडोदरा स्थित टाटा-एयरबस फाइनल असेंबली लाइन (FAL) में तैयार किए गए देश के पहले स्वदेशी Airbus C-295 सैन्य परिवहन विमान ने सफलतापूर्वक अपनी पहली परीक्षण उड़ान पूरी कर ली है। यह उपलब्धि न केवल भारतीय रक्षा उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, बल्कि केंद्र सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी नई मजबूती प्रदान करती है।
10 जून 2026 को वडोदरा स्थित अत्याधुनिक विनिर्माण केंद्र से उड़ान भरने वाले इस विमान ने सफल परीक्षण के साथ यह साबित कर दिया कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उन्नत सैन्य विमानों का निर्माता बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। एयरबस और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) की साझेदारी में तैयार किया गया यह विमान भारतीय वायुसेना को सौंपे जाने से पहले आवश्यक परीक्षण प्रक्रियाओं से गुजर रहा है।
इस उपलब्धि को ऐतिहासिक इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि यह भारत में किसी निजी क्षेत्र की कंपनी द्वारा निर्मित पहला सैन्य विमान है। साथ ही, यह पहला ‘मेड-इन-इंडिया’ C-295 परिवहन विमान भी है। इससे भारत की आयातित सैन्य प्लेटफॉर्मों पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना देश के एयरोस्पेस विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगी।
इस परियोजना की नींव सितंबर 2021 में रखी गई थी, जब भारत सरकार ने एयरबस डिफेंस एंड स्पेस के साथ 21,935 करोड़ रुपये का समझौता किया था। इस अनुबंध के तहत भारतीय वायुसेना के पुराने Avro-748 परिवहन विमानों को बदलने के लिए कुल 56 C-295 विमान खरीदे जाने हैं। इनमें से 16 विमान स्पेन से सीधे तैयार अवस्था में भारत को दिए जा रहे हैं, जबकि शेष 40 विमानों का निर्माण और असेंबली भारत में वडोदरा स्थित संयंत्र में किया जा रहा है।
वडोदरा की यह फाइनल असेंबली लाइन वर्ष 2024 में शुरू की गई थी और इसे भारत की पहली निजी क्षेत्र आधारित सैन्य विमान निर्माण सुविधा माना जाता है। यह संयंत्र विमान असेंबली, सिस्टम इंटीग्रेशन, परीक्षण एवं प्रमाणीकरण, उड़ान परीक्षण, भारतीय वायुसेना को डिलीवरी तथा दीर्घकालिक रखरखाव और तकनीकी सहायता जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहा है। इस परियोजना से जुड़े दर्जनों भारतीय आपूर्तिकर्ता देश में एक मजबूत घरेलू एयरोस्पेस सप्लाई चेन विकसित करने में योगदान दे रहे हैं।
स्वदेशीकरण के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है। इसके तहत 13,000 से अधिक विमान पुर्जों का निर्माण भारत में किया जाएगा। कई प्रमुख संरचनात्मक हिस्सों और महत्वपूर्ण कंपोनेंट असेंबलियों का उत्पादन भी देश में ही हो रहा है। इतना ही नहीं, सभी 56 विमानों में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम लगाए जाएंगे। समय के साथ इस परियोजना में स्थानीय विनिर्माण और तकनीकी भागीदारी का स्तर और बढ़ने की उम्मीद है।
Airbus C-295 एक बहुउद्देश्यीय सामरिक सैन्य परिवहन विमान है, जिसे विभिन्न प्रकार के मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है। यह एक बार में 71 सैनिकों को ले जाने में सक्षम है, जबकि लगभग 50 पैराट्रूपर्स को एयरड्रॉप मिशन के लिए तैनात किया जा सकता है। विमान 5 से 10 टन तक का माल ढो सकता है और चिकित्सा निकासी अभियानों में एयर एम्बुलेंस के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है। प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय सहायता अभियानों में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह है कि यह छोटे और अर्ध-तैयार रनवे से भी उड़ान भर सकता है और उतर सकता है, जिससे सीमावर्ती, पर्वतीय और दूरदराज के इलाकों में इसका उपयोग अत्यंत प्रभावी हो जाता है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि C-295 कार्यक्रम भारत को रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में नई गति देगा। इससे देश में उच्च कौशल वाले रोजगार अवसर पैदा होंगे, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और भारतीय एयरोस्पेस उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, भविष्य में भारत के लिए एयरोस्पेस कंपोनेंट्स और विमान प्रणालियों के निर्यात का मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है।
वडोदरा से उड़ान भरने वाले पहले स्वदेशी C-295 की सफलता केवल एक परीक्षण उड़ान नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता, औद्योगिक आत्मविश्वास और रक्षा क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
