भारत में हवा बन गई जानलेवा: वायु प्रदूषण ने धूम्रपान को पीछे छोड़ा, लाखों लोग असमय मौत के कगार पर
भारत में 2023 में वायु प्रदूषण से करीब 20 लाख मौतें हुईं, जो धूम्रपान से होने वाली अनुमानित मौतों से भी अधिक हैं। नई रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि वायु प्रदूषण अब सार्वजनिक स्वास्थ्य का सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। इस लेख में जानिए आंकड़े, स्वास्थ्य प्रभाव और नीतिगत चुनौतियाँ।

ज़हरीली हवा (संकेतिक तस्वीर)
2025 की ताज़ा रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत में वायु गुणवत्ता में गिरावट के कारण होने वाली मौतें अब धूम्रपान से फैलने वाले जानलेवा खतरों से भी आगे निकल चुकी हैं। इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 2023 में लगभग 20 लाख लोगों की मृत्यु वायुप्रदूषण (ambient air pollution) से जुड़ी थी एक ऐसी गम्भीर स्वास्थ्य चुनौती, जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता रहा।
स्वास्थ्य अनुसंधान संगठन Institute for Health Metrics and Evaluation (IHME) और Health Effects Institute (HEI) द्वारा प्रकाशित State of Global Air 2025 Report के अनुसार, भारत में 2023 में वायुप्रदूषण से जुड़ी मौतों की संख्या लगभग 20 लाख रही। यह आंकड़ा न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह इस ओर भी संकेत करता है कि वायु प्रदूषण अब हमारे सामने धूम्रपान की तुलना में कहीं अधिक जानलेवा खतरा बन चुका है।
वायुप्रदूषण के चलते होने वाली मौतों में सिर्फ फेफड़ों की बीमारी ही नहीं, बल्कि हृदय रोग, स्ट्रोक, फेफड़ी का कैंसर, डायबिटीज़ व अन्य दीर्घकालिक बीमारियाँ शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 89 प्रतिशत मौतें गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) के कारण हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या केवल दूरस्थ गाँवों या औद्योगिक शहरों तक सीमित नहीं है, महानगरों और ग्रामीण क्षेत्रों दोनों को इसके दायरे में रखा गया है। वायु प्रदूषण की वजह से स्वस्थ और युवा लोग भी असमय मृत्यु के शिकार हो सकते हैं; खासकर बूढ़े, बच्चे और पूर्व-घात या अस्थायी बीमारी वाले लोग अधिक जोखिम में हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति और जागरूकता की दिशा में अहम संकेत:
वर्तमान स्थिति स्पष्ट करती है कि वायु प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण‑चिंता नहीं रहा, यह सार्वजनिक स्वास्थ्य का सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। सरकारों, स्थानीय प्रशासन, नीति निर्माताओं और नागरिकों के लिए यह वक्त़ सजग होने का है।
- औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों, निर्माण कार्यों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले PM2.5 तथा PM10 कणों की निगरानी और नियंत्रण को कड़ा बनाना होगा।
- सार्वजनिक परिवहन, हरित क्षेत्र विस्तार, स्वच्छ ईंधन उपयोग और प्रदूषण नियंत्रण मानकों का सख्ती से पालन जरूरी है।
- आम नागरिकों को मास्क उपयोग, वायु गुणवत्ता सूचनाओं पर नजर, तथा बचाव के उपायों के प्रति जागरूक बने रहना चाहिए।
- harat vayu pradushan 2023 mrityuIndia ambient air pollution deaths 20252023 India air pollution mortality dataBharat mein dhumrapan ke muqable vayu pradushanIndia air pollution vs smoking deathsIHME HEI State of Global Air 2025 IndiaPM2.5 india health reportवायु प्रदूषण मौतें भारत 2023ambient air pollution India reportair pollution death toll India 2023Bharat air pollution health crisisDelhi air pollution mortalityIndia clean air policy urgencyवायु गुणवत्ता स्वास्थ्य सुधार भारतIndia NCD deaths air pollutionindia aqi statedelhbi aqi updatesdelhi aqi protestdelhi-mumbai aqi reportmumbai aqi newsmumbai aqitoday's aqi in mumbaitoday's aqi in delhitoday's aqi in indiapratahkal newspratahkal daily

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
