राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने एक बार फिर आंध्र प्रदेश वन विभाग को रेड सैंडर (Red Sanders) संरक्षण के लिए 14.88 करोड़ रुपये (लगभग 1.65 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की धनराशि जारी की है। यह राशि 29 फॉर्म-आई आवेदन के आधार पर जैविक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभ के हिस्से के रूप में दी गई है।

इस नवीनतम राशि के जारी होने के साथ ही भारत में अब तक की कुल एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) वितरण राशि 143 करोड़ रुपये (लगभग 15.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर) से अधिक हो गई है। आंध्र प्रदेश को अब तक रेड सैंडर संरक्षण और अन्य लाभार्थियों के लिए 104 करोड़ रुपये (लगभग 12.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर) जारी किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना जैसे विभिन्न राज्यों को भी 15 करोड़ रुपये (लगभग 1.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर) से अधिक राशि वितरित की जा चुकी है।

एनबीए के इस कदम का मुख्य उद्देश्य रेड सैंडर की सुरक्षा, संरक्षण, पुनर्जीवन, अनुसंधान और विकास, जागरूकता निर्माण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना है। यह प्रावधान भारतीय जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत किया जाता है, जो जैविक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभ के उचित और समान वितरण को सुनिश्चित करता है।

रेड सैंडर, जो अपनी मूल्यवान लकड़ी और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है, आंध्र प्रदेश के जंगलों का एक महत्वपूर्ण जैविक संसाधन है। इसके अवैध शिकार और वनों की कटाई के कारण इसकी सुरक्षा एक बड़ी चुनौती रही है। एनबीए द्वारा ABS के माध्यम से राशि जारी करना न केवल संरक्षण कार्यों को प्रोत्साहित करता है, बल्कि स्थानीय समुदायों और लाभार्थियों को भी सीधे लाभ पहुंचाने का एक कानूनी और व्यवस्थित तरीका है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की वित्तीय सहायता से आंध्र प्रदेश वन विभाग रेड सैंडर के संरक्षण में नई रणनीतियों और तकनीकों को लागू कर सकता है। इसमें शामिल हैं जंगलों का पुनर्स्थापन, अवैध कटाई पर निगरानी, अनुसंधान परियोजनाएं और स्थानीय समुदायों के बीच जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाना।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि ABS फंड का उद्देश्य केवल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जैविक संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग और लाभ साझा करने के मॉडल को सुदृढ़ करने का भी अवसर प्रदान करता है। इससे भारत जैव विविधता संरक्षण के वैश्विक मानकों के अनुरूप कदम उठा रहा है।

इस नवीनतम वितरण के साथ, आंध्र प्रदेश रेड सैंडर संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर चुका है। यह कदम न केवल वन्य जीवन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में निर्णायक साबित होगा, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी ABS मॉडल को प्रभावी और अनुकरणीय उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करेगा।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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