Abhishek Banerjee attack Sonarpur : पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए जानलेवा हमले ने राज्य की राजनीतिक फिजा में बारूद घोल दिया है। इस घटना के बाद से ही पूरे बंगाल में सियासी उबाल चरम पर है और तृणमूल कांग्रेस अब इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रही है। सोनारपुर में हिंसा पीड़ित पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात करने पहुंचे अभिषेक बनर्जी को जिस तरह सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया, उसने न केवल राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं बल्कि देश के राजनीतिक गलियारों में भी एक नई बहस छेड़ दी है। इस अप्रत्याशित हमले के तुरंत बाद पूरे विपक्षी कुनबे ने एकजुटता दिखाते हुए केंद्र की सत्ताधारी दल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिससे यह साफ है कि आगामी दिनों में यह विवाद कानूनी और विधायी स्तर पर एक बड़ा रूप अख्तियार करने वाला है।

घटनाक्रम के अनुसार, अभिषेक बनर्जी सोनारपुर में हालिया राजनीतिक हिंसा के शिकार हुए टीएमसी कार्यकर्ताओं का हालचाल जानने और उनके प्रति एकजुटता प्रकट करने पहुंचे थे। इसी दौरान उन पर यह हमला हुआ, जिसे उन्होंने सीधे तौर पर एक गहरी राजनीतिक साजिश करार दिया है। बनर्जी ने इस पूरी हिंसक घटना के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को डराने और दबाने के लिए इस प्रकार की हिंसक राजनीति का सहारा लिया जा रहा है। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए इंडिया (INDIA) ब्लॉक के शीर्ष नेताओं ने एकजुट होकर इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई राष्ट्रीय नेताओं ने इस हमले को प्रतिशोध की राजनीति का निकृष्टतम उदाहरण बताया है और आरोप लगाया है कि बीजेपी बंगाल में लोकतांत्रिक आवाजों को कुचलने का प्रयास कर रही है।

इस पूरे मामले में अब कानूनी और आधिकारिक मोर्चे पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो चुकी है। एआईटीसी (AITC) के बेहद विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, सांसद अभिषेक बनर्जी अपने ऊपर हुए इस हमले की औपचारिक शिकायत सीधे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से करने जा रहे हैं, क्योंकि एक मौजूदा सांसद की सुरक्षा और विशेषाधिकार का यह सीधा उल्लंघन है। इसके साथ ही, टीएमसी इस मामले को देश की सर्वोच्च कानूनी व्यवस्था के समक्ष ले जाने की तैयारी में है, जिसके तहत बहुत जल्द अदालत का रुख कर एक औपचारिक और आपराधिक शिकायत दर्ज कराई जाएगी। पार्टी का कानूनी सेल इस हमले से जुड़े सभी वीडियो फुटेज और साक्ष्यों को एकत्रित कर रहा है ताकि अदालत में विपक्षी ताकतों के खिलाफ एक मजबूत और अकाट्य मामला पेश किया जा सके।

दूसरी तरफ, विरोधी खेमे ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे टीएमसी के पिछले कुशासन का नतीजा बताया है। पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्रियों और बीजेपी नेताओं ने इस घटना पर तीखा पलटवार किया है। मंत्री दिलीप घोष ने मीडिया से मुखातिब होते हुए तंज कसा कि अब धरातल पर जनता का वास्तविक रोष सामने आ रहा है। उन्होंने फाल्टा चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए कहा कि जनता इन लोगों से कितनी नाराज थी, यह इस बात से साफ हो जाता है कि टीएमसी वहां चौथे नंबर पर सिमट गई थी। इसी सुर में सुर मिलाते हुए सरकार की एक अन्य मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि पिछले 15 वर्षों की सत्ता के दौरान खुद को भगवान समझने का अहंकार ही आज जनता के इस गुस्से के रूप में बाहर आ रहा है, जहां लोग जूते और अंडे फेंककर अपना आक्रोश जता रहे हैं। बहरहाल, पक्ष-विपक्ष के इन तीखे बयानों और कानूनी कार्रवाइयों के बीच सोनारपुर की इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल की धरती पर राजनीतिक वर्चस्व की यह जंग अब एक बेहद संवेदनशील और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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