जम्मू शहर की रफ्तार ने इस बार एक पत्रकार और उसकी परिवार की ज़िंदगी को पूरी तरह बदल दिया। जब Jammu Development Authority (JDA) ने एक अचानक आये अवैध निर्माण उन्मूलन अभियान के दौरान 40‑साल पुरानी पैतृक हवेली को Bulldozer से ध्वस्त कर दिया, तो घबराहट, आक्रोश और गुमराहगी ने साथ देने की बजाय एक अनोखी इंसानी पहल ने सबको चौंका दिया।


परिवार के अनुसार, पत्रकार अरफ़ाज़ अहमद डाइंग का यह घर 40 वर्षों से उनका अपना था; उन्होंने कभी किसी कानूनी नोटिस या आदेश की सूचना नहीं दी गई। लेकिन अचानक एक सुबह, JDA की टीम ने घर पर बुलडोजर चला दिया और हवेली को धूल में बदल दिया। अधिकारियों का कहना है कि यह निर्माण “unauthorised” था वहीं डाइंग का दावा है कि यह कार्रवाई उनकी बेनाम खबरों, विशेष रूप से सीमा पार ड्रग तस्करी पर रिपोर्टिंग के बाद हुई हरकत की “पत्रकारों को दबाने” की कोशिश हो सकती है।

दारा‑दार मिट्टी के मलबे के नीचे कुचले उस घर की यादें, किताबें, दस्तावेज सब कुछ आ गया। परिवार व पत्रकार दोनों के लिए यह सिर्फ जायदाद की हानि नहीं थी। यह आज़ादी की आवाज़, सुरक्षाहीनता और किसी भी असहमति पर प्रशासन की बेदर्दी का प्रतीक बन कर खड़ा हो गया।

हिंदू पड़ोसी की अनूठी पहल:

लेकिन इसी घड़ी में, जब लोगों की नज़रें सिर्फ बरबादी पर टिकी थीं, एक आम हिन्दू पड़ोसी कुलदीप शर्मा सामने आया। उसने न सिर्फ डाइंग के परिवार को दिलासा दिया, बल्कि पांच मरला जमीन उपहार स्वरूप देने का प्रस्ताव रखा रेबिल्डिंग के लिए। उसने यह भी कहा कि वह वापस कदम नहीं हटाएगा, और डाइंग परिवार को सड़क पर नहीं छोड़ने देगा। देखते ही देखते, उपहार‑देय जमीन का कागज़ औपचारिक रूप से हस्तांतरित हो गया। वीडियो हुआ वायरल उस समय जब एक धर्मपथ पर खड़ी एक इंसानी पहल ने पूरी सामाजिक और राजनैतिक चर्चा छेड़ दी।

प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई एक सामान्य एंटी‑एन्क्रोचमेंट ड्राइव थी किसी धर्म, पहचान या रिपोर्टिंग से संबंधित नहीं। लेकिन पत्रकारों संगठनों और नागरिक समाज के कई प्रतिनिधियों ने इसे “चुप्पी का दांत” कहकर न्यायिक समीक्षा और आदेश पूर्व सूचना देने की मांग उठाई है। कई नेताओं ने कहा कि चाहे निर्माण अवैध हो, लेकिन 40 साल से परिवार का आशियाना हो तो नोटिस देना आवश्यक था। इस तरह अचानक हुआ ध्वस्तीकरण लोकतंत्र और प्रेस स्वतंत्रता दोनों पर सवाल खड़े करता है।

इस घटना ने सिर्फ एक पत्रकार की बेघर हुई ज़िंदगी तक सीमित नहीं रखा। यह भारत में बढ़ते धार्मिक ध्रुवीकरण, मीडिया की स्थिति, नागरिक अधिकार और प्रशासन की जवाबदेही इन सब पर एक बड़ा दर्पण है। और साथ ही कुलदीप शर्मा जैसे साधारण व्यक्ति का मानवीय कदम दिखाता है कि साम्प्रदायिकता के बीच भी सहिष्णुता और सहारा मिल सकता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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