मुर्शिदाबाद से उठी यह चर्चा अब राष्ट्रीय राजनीति का केंद्रबिंदु बन चुकी है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ से लेकर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद तक, बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद को लेकर चल रही चर्चाएँ और प्रदर्शन एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप ले चुकी हैं। यह मामला सिर्फ धार्मिक संरचना तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक ध्रुवीकरण, संवैधानिक अधिकारों और साम्प्रदायिक भावनाओं के बीच संतुलन की चुनौती बन गया है।

दिसंबर 2025 में मुर्शिदाबाद के रीजनगर में हुई एक महत्वपूर्ण घटना ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी। यहाँ के सस्पेंड टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ने 1992 में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की याद में एक समान शैली की मस्जिद के लिए आधारशिला रखी। यह कार्यक्रम बाबरी मस्जिद विध्वंस की वर्षगांठ पर आयोजित किया गया और हजारों समर्थकों की उपस्थिति के बीच भारी पुलिस सुरक्षा के साथ सम्पन्न हुआ।


हालाँकि, इस कदम ने राजनीतिक विवाद भी जन्म दिया। टीएमसी ने कबीर को “साम्प्रदायिक राजनीति” में शामिल होने का आरोप लगाते हुए निलंबित कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी जनता उन्नयन पार्टी की स्थापना की।

कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर इस प्रकार के निर्णय और प्रतिक्रियाएँ रही हैं:

  • कोलकाता उच्च न्यायालय ने बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद के कार्यक्रम के खिलाफ रोक लगाने से इंकार किया, लेकिन राज्य सरकार को आयोजन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया।
  • विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि हुमायूं कबीर के खिलाफ FIR दर्ज की जाए, यह कहते हुए कि मस्जिद योजना अवैध और आपत्तिजनक हो सकती है।
  • भाजपा और अन्य पार्टियों ने इस योजना की आलोचना की और इसके विरोध में कुछ भाजपा नेताओं ने मुर्शिदाबाद में राम मंदिर परियोजना के लिए भूमि पूजन समारोह आयोजित किया।


कबीर ने इस मस्जिद को “भावनात्मक पुनर्स्थापन” और लोगों का संवैधानिक अधिकार बताते हुए कहा कि परिसर में अस्पताल, स्कूल और हेलिपैड जैसी सुविधाएँ भी होंगी। इस योजना ने बड़ी संख्या में जनता का समर्थन और व्यापक दान आकर्षित किया, जिसकी राशि ₹3 करोड़ से अधिक बताई गई। फरवरी 2026 तक मुर्शिदाबाद मस्जिद विवाद के इर्द-गिर्द राजनीतिक और सामाजिक समूह सक्रिय रूप से संगठित हैं। उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में पोस्टर, बुलावे और मार्च चलाए जा रहे हैं, जिससे यह मामला स्थानीय स्तर से उठकर राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन गया है।

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बयान दिया कि “अयोध्या में गिराई गई बाबरी मस्जिद को पुनः नहीं बनाया जा सकता,” और इस तरह की किसी भी पुनर्निर्माण कोशिशों का विरोध किया। इस पूरी घटना ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद स्वरूप मस्जिद निर्माण को एक संवेदनशील, विवादास्पद और राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक-सामाजिक विमर्श का केंद्र बना दिया है, जो भविष्य में भारत की राजनीति और सांप्रदायिक संवाद पर प्रभाव डाल सकती है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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