देश की सांस्कृतिक और संगीत धरोहर के उज्जवल सितारे 9 वर्षीय एस्थर लालदुहावमी हनमते ने 26 दिसंबर 2025 को एक ऐतिहासिक पल की साक्षी बनाई। मिज़ोरम के लुंगलेई में जन्मी इस बाल कलाकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष ‘माँ तुझे सलाम’ और ‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति देकर उपस्थित सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। एस्थर, जिनका जन्म 2016 में हुआ, बचपन से ही संगीत की गहरी लगन में रहीं। उनकी गायकी की शुरुआत मात्र तीन वर्ष की आयु में चर्च आयोजनों से हुई, जहां उनकी मधुर आवाज ने सभी को आकर्षित किया। समय के साथ-साथ उनका हुनर सोशल मीडिया और असम राइफल्स के साथ वायरल वीडियो के माध्यम से व्यापक रूप से पहचान में आया।



उसी दिन सुबह, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में एक भव्य समारोह के दौरान प्रदान किया गया। उनके माता-पिता और परिवारजन भी इस अवसर पर उपस्थित रहे, और उनका गौरव पूर्ण आनंद देखा गया।

प्रस्तुति के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एस्थर की आवाज़ और आत्मविश्वास की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतिभाएँ देश के सांस्कृतिक गौरव को बढ़ाती हैं और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती हैं। इसके साथ ही, बाल पुरस्कार समारोह में विभिन्न राज्यों के पुरस्कार विजेताओं ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिससे यह कार्यक्रम और भी रंगीन और प्रेरणादायक बन गया।

मिज़ोरम और अन्य क्षेत्रों के नेताओं ने एस्थर की प्रस्तुति और उनके राष्ट्रीय सम्मान को गौरव का क्षण बताया। उनके पिता, जो एक लुंगलेई के कारीगर हैं, ने मीडिया को बताया कि एस्थर की यह सफलता परिवार और समुदाय के लिए एक अनमोल सम्मान है।



विशेष रूप से यह ध्यान देने योग्य है कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार उन बच्चों को दिया जाता है जिन्होंने कला, संस्कृति, विज्ञान और सामाजिक क्षेत्रों में असाधारण योग्यता दिखाई हो। एस्थर का यह पुरस्कार केवल उनकी प्रतिभा की ही नहीं, बल्कि उनके राष्ट्रीय प्रेम और सामाजिक योगदान की भी मान्यता है।

इस अवसर ने यह संदेश भी दिया कि ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों में जन्मे बच्चे भी उचित मार्गदर्शन और मेहनत से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं। एस्थर की कहानी युवाओं और बच्चों के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई है, जो बताती है कि जन्मभूमि या सामाजिक पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर सपनों को साकार किया जा सकता है।

दिन का यह पल न केवल एस्थर के लिए, बल्कि उनके परिवार, मिज़ोरम और पूरे देश के लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण बन गया। उनके गाने और सम्मान ने यह प्रमाणित किया कि कला और संस्कृति के माध्यम से बच्चों में राष्ट्रीय भावना और आत्मविश्वास कैसे विकसित हो सकता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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