Rainwater Harvesting Projects : भारत अपनी जल सुरक्षा को लेकर एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। गिरते भूजल स्तर की चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक के सबसे बड़े संरक्षण अभियान 'कैच द रेन- जल संचय जन भागीदारी (JSJB)' के माध्यम से देश की धरती की प्यास बुझाने का बीड़ा उठाया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2024 में शुरू हुई इस पहल के तहत अब तक रिकॉर्ड 39.6 लाख से अधिक कृत्रिम भूजल रिचार्ज और जल संग्रहण परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी हैं।

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सरकार का लक्ष्य केवल तालाब बनाना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक पद्धति से भूजल को पुनर्जीवित करना है। भूजल कृत्रिम रिचार्ज मास्टर प्लान के तहत देशभर में 1.42 करोड़ संरचनाएं बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य लगभग 185 अरब घन मीटर भूजल को दोबारा भरकर भविष्य के संकट को टालना है।

इस महा-योजना के तहत अपनाई जा रही रणनीतियों के प्रमुख स्तंभ इस प्रकार हैं:

  • व्यापक ढांचा: देश भर में 43 हजार भूजल निगरानी केंद्र और 712 जल शक्ति केंद्र चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं।
  • अटल भूजल योजना: गुजरात, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे जल-संकट वाले राज्यों में सामुदायिक भागीदारी से 6.68 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पानी का कुशल उपयोग सुनिश्चित किया गया है।
  • मिशन अमृत सरोवर: अप्रैल 2022 से अब तक 68,000 से अधिक तालाबों का निर्माण पूरा हो चुका है, जो प्रति तालाब 10,000 घन मीटर पानी सहेजने की क्षमता रखते हैं।

नीतिगत प्रहार: 21 राज्यों ने अपनाया मॉडल विधेयक

जल संकट केवल बुनियादी ढांचे से नहीं, बल्कि कड़े नियमों से भी हल होगा। भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित 'भूजल मॉडल विधेयक' को अब तक 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपना लिया है। बिहार, पंजाब और हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्यों में इस कानून को लागू करना एक मील का पत्थर माना जा रहा है। यह विधेयक पानी के अंधाधुंध दोहन पर रोक लगाने और टिकाऊ प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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