Scientific plantation in Gujarat : पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक इकोसिस्टम के पुनर्जीवन की दिशा में गुजरात सरकार ने वडनगर से एक सशक्त और दूरगामी संदेश दिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे हरित अभियानों के तहत मेहसाणा जिले के ऐतिहासिक शहर वडनगर को हराभरा बनाने की एक व्यापक और वैज्ञानिक पहल शुरू की गई है। इस महत्वाकांक्षी प्रयास में तेलंगाना स्थित हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है।

इस परियोजना के अंतर्गत वडनगर की आठ ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जा रहा है। इनमें तोरण होटल, लटेरी वाव, अंबाजी कोठा झील, विष्णुपुरी झील सहित अन्य प्रमुख स्थल शामिल हैं। इन स्थानों पर रुद्राक्ष, महोगनी, गोल्डन बैम्बू जैसी दुर्लभ और पर्यावरणीय दृष्टि से उपयोगी प्रजातियों के हजारों पौधे लगाए गए हैं। अब तक करीब 50 हजार पौधों का रोपण किया जा चुका है और यह कार्य निरंतर जारी है।

हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के अहमदाबाद जोनल कॉर्डिनेटर केजल कंसारा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान इस पूरी पहल की प्रेरणा का प्रमुख आधार है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मां हमें जीवन देती है, उसी तरह धरती मां भी मानव जीवन का आधार है। पेड़ इस सृष्टि के अनिवार्य तत्व हैं, जो ऑक्सीजन प्रदान करने के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वातावरण को शुद्ध करते हैं। इसी भाव के साथ हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट इस अभियान को जमीनी स्तर पर साकार कर रहा है।

उन्होंने जानकारी दी कि वडनगर में इस अभियान की शुरुआत विष्णुपुरी तालाब से की गई थी, जिसके लिए सरकार की ओर से कुल आठ स्थल उपलब्ध कराए गए हैं। ये सभी स्थल ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के हैं। वडनगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मस्थली और कर्मस्थली होने के कारण यहां किए जा रहे पर्यावरणीय प्रयासों का महत्व और भी बढ़ जाता है। पौधों के संरक्षण और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि उनका दीर्घकालीन विकास सुनिश्चित किया जा सके।

हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के वॉलंटियर डॉ. आदित्य चौधरी ने बताया कि गुजरात सरकार द्वारा सौंपे गए इन आठ स्थलों पर इकोसिस्टम के पुनर्जीवन की पूरी जिम्मेदारी संस्थान निभा रहा है। इसके तहत झीलों के आसपास रेन फॉरेस्ट पैटर्न पर पौधरोपण किया जा रहा है। पौधरोपण के बाद इन स्थलों का कम से कम तीन वर्षों तक वैज्ञानिक तरीके से रखरखाव किया जाता है। तीन वर्षों के पश्चात जब पेड़ पूरी तरह विकसित हो जाते हैं और इकोसिस्टम संतुलित हो जाता है, तब इन स्थलों को स्थानीय प्रशासन को सौंप दिया जाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि सभी पौधे हैदराबाद से लाए जाते हैं और इन्हें लगाने के लिए एक विशेष वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके अंतर्गत तीन फीट गहरी पिटिंग कर उसे सात से दस दिनों तक अनुकूलन के लिए छोड़ा जाता है। इसके बाद एक्टिवेटेड चारकोल, कोकोपिट और मिट्टी का मिश्रण डाला जाता है। वर्मी कम्पोस्ट और नीम केक मिलाने के बाद पौधरोपण किया जाता है तथा ड्रिप इरिगेशन प्रणाली से नियमित सिंचाई की जाती है। आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रिप इरिगेशन और रेन गन के माध्यम से पौधों की देखभाल की जा रही है, जिससे उनका स्वस्थ विकास सुनिश्चित हो रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार अब तक लगाए गए अधिकांश पौधों की वृद्धि संतोषजनक है, जो इस वैज्ञानिक मॉडल की सफलता को दर्शाता है। वडनगर में चल रहा यह हरित अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘ग्रीन गुजरात, ग्रीन इंडिया’ के संकल्प को भी प्रभावी रूप से साकार कर रहा है।

यह पहल इस बात का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है कि सरकार, संस्थानों और समाज के सामूहिक प्रयास से न केवल ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण किया जा सकता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संतुलित और स्वच्छ प्राकृतिक वातावरण भी तैयार किया जा सकता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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