हरियाणा के औद्योगिक शहर फरीदाबाद में एक कॉलेज इंटर्न की सोशल मीडिया पोस्ट ने नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर की बदहाल सड़कों, सीवर ओवरफ्लो और कूड़े के ढेरों को उजागर करने वाली तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर वायरल होते ही प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई। मामला इतना बढ़ा कि अंततः नगर निगम के एक सहायक अभियंता को निलंबित करना पड़ा।



बताया जा रहा है कि एक कॉलेज इंटर्न, जिसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ‘Biased Indian’ नाम से पोस्ट साझा की, ने शहर के कई इलाकों की खराब हालत को सामने लाने का अभियान शुरू किया। उसने विशेष रूप से शहर के सेक्टर 91 और सेक्टर 37 में टूटी सड़कों, सीवर के पानी से भरी गलियों और जगह-जगह लगे कूड़े के ढेरों की तस्वीरें और वीडियो साझा किए। इन पोस्टों में उसने स्थानीय अधिकारियों को टैग करते हुए यह सवाल उठाया कि वर्षों से ‘स्मार्ट सिटी’ परियोजना के लिए मिले फंड के बावजूद शहर की बुनियादी सुविधाओं की हालत इतनी खराब क्यों है। देखते ही देखते ये पोस्ट वायरल हो गईं और हजारों लोगों ने इन्हें साझा किया।


जनता का समर्थन और प्रशासन पर दबाव:

सोशल मीडिया पर इस मुहिम को लोगों का व्यापक समर्थन मिला। हजारों यूज़र्स ने इंटर्न की पहल की सराहना करते हुए इसे जवाबदेही की दिशा में एक साहसिक कदम बताया। कई लोगों ने अपने-अपने इलाकों की समस्याओं की तस्वीरें भी साझा कीं, जिससे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल और तेज हो गए। इसी दौरान इंटर्न ने दावा किया कि शहर की स्थिति पर सवाल उठाने के बाद उसे कुछ धमकी भरे फोन कॉल भी आए। हालांकि बाद में उसने एक और पोस्ट कर यह कहा कि अब वह सुरक्षित है।



घटना के कुछ समय बाद इंटर्न ने एक और पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उसकी पहले की टिप्पणियों को लेकर “कुछ गलतफहमी” हो गई थी और शहर के कई हिस्से अच्छी तरह विकसित भी हैं। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या उस पर किसी प्रकार का दबाव बनाया गया था।


प्रशासनिक कार्रवाई और निलंबन:

वायरल पोस्टों और बढ़ते जनदबाव के बीच 10 मार्च को एक आधिकारिक आदेश जारी हुआ, जिसमें नगर निगम के सहायक अभियंता विनोद को निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई को कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस बात का उदाहरण बताया कि एक व्यक्ति की आवाज भी व्यवस्था को जवाबदेह बनाने में भूमिका निभा सकती है। इसके साथ ही शहर की स्थिति को लेकर पहले से उठ रहे सवाल भी फिर चर्चा में आ गए। फरवरी में जारी एक सीएजी (CAG) ऑडिट रिपोर्ट में भी नगर निगम की परियोजनाओं और देरी से जुड़े कई मुद्दों का उल्लेख किया गया था, जिसने प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बहस को और तेज कर दिया।



यह पूरा मामला इस बात का उदाहरण बनकर सामने आया है कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया नागरिकों के लिए अपनी आवाज उठाने का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है। एक साधारण इंटर्न की पोस्ट ने न केवल शहर की समस्याओं को राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई भी देखने को मिली।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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