1 अप्रैल 2026 को पूरा ओडिशा अपने स्थापना दिवस ‘उत्कल दिवस’ या ‘ओडिशा दिवस’ का 90वां वर्ष मना रहा है। यह दिन केवल एक राज्य के गठन का स्मरण नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और पहचान की लंबी लड़ाई के सफल परिणाम का प्रतीक है। 1936 में ब्रिटिश शासन के दौरान ओडिशा को भाषाई आधार पर एक अलग प्रांत का दर्जा मिला, जिसने भारतीय इतिहास में क्षेत्रीय पहचान की नई दिशा तय की।

ओडिशा की यह यात्रा 1568 में अंतिम राजा मुकुंद देव की हार और निधन के बाद शुरू हुई, जब राज्य ने अपनी राजनीतिक पहचान खो दी थी। इसके बाद करीब तीन शताब्दियों तक ओडिया भाषी क्षेत्रों को विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित रखा गया। लेकिन 20वीं सदी के शुरुआती दशकों में ओडिया अस्मिता को पुनः स्थापित करने के लिए एक व्यापक आंदोलन शुरू हुआ, जिसने अंततः 1 अप्रैल 1936 को ओडिशा के गठन का मार्ग प्रशस्त किया।



इस ऐतिहासिक आंदोलन की नींव उत्कल सम्मिलनी के गठन के साथ रखी गई, जिसने तीन दशकों तक जनजागरण और संगठनात्मक प्रयासों के जरिए एक अलग राज्य की मांग को मजबूती दी। इस संघर्ष को दिशा देने में कई प्रमुख नेताओं और समाज सुधारकों की अहम भूमिका रही, जिनमें मधुसूदन दास, गोपबंधु दास, राम चंद्र भंज देव, कृष्ण चंद्र गजपति और फकीर मोहन सेनापति जैसे नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन नेताओं के नेतृत्व में यह आंदोलन जनआंदोलन में परिवर्तित हुआ, जिसे व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हुआ।


ओडिशा अपने समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों के लिए भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। राज्य के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं:

  • जगन्नाथ मंदिर पुरी
  • कोणार्क सूर्य मंदिर

  • पुरी बीच
  • लिंगराज मंदिर
  • रघुराजपुर कलाकार गांव
  • नंदनकानन प्राणी उद्यान
  • चिल्का झील
  • उदयगिरि गुफाएं

ब्रिटिश प्रशासन के तहत गठित इस नए प्रांत में प्रारंभिक रूप से छह जिले शामिल थे—कटक, पुरी, बालेश्वर, संबलपुर, कोरापुट और गंजाम। कटक को इसकी राजधानी बनाया गया। प्रशासनिक दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण परिवर्तन था, जिसने ओडिया भाषी लोगों को एक साझा प्रशासनिक और सांस्कृतिक मंच प्रदान किया। ओडिशा के पहले गवर्नर के रूप में जॉन ऑस्टिन हबबैक ने शपथ ली।

समय के साथ राज्य का विस्तार और प्रशासनिक पुनर्गठन हुआ, और 1 अप्रैल 2019 तक ओडिशा में कुल 30 जिले हो चुके हैं। यह विकास राज्य के प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण और जनसंख्या के अनुरूप शासन व्यवस्था के विस्तार को दर्शाता है।



उत्कल दिवस के अवसर पर पूरे राज्य में भव्य उत्सव आयोजित किए जाते हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम, झांकियां, पारंपरिक नृत्य-संगीत और आतिशबाजी इस दिन को खास बनाते हैं। ओडिया समुदाय देश-विदेश में इस दिन को अपनी सांस्कृतिक एकता और गौरव के रूप में मनाता है। यह दिन उन सभी महान विभूतियों को श्रद्धांजलि देने का अवसर भी है, जिन्होंने ओडिशा को एकजुट करने और उसकी पहचान स्थापित करने में योगदान दिया।


उत्कल दिवस केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और राजनीतिक संघर्ष की जीवंत गाथा है। 90 वर्षों का यह पड़ाव न केवल अतीत की उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि भविष्य की संभावनाओं का भी संकेत देता है—जहां ओडिशा अपनी पहचान, विकास और परंपराओं के संतुलन के साथ आगे बढ़ रहा है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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