ओडिशा के क्योंझर जिले में आज मानवता और वन्यजीव संघर्ष की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर सामने आई, जहां एक जंगली हाथी को करीब छह घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मौत के मुहाने से सुरक्षित बाहर निकाला गया। जिले के बनजोड़ी गांव में हुई यह घटना न केवल वन विभाग की कार्यकुशलता की मिसाल बनी, बल्कि इसके बाद हुए नाटकीय घटनाक्रम ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। बुधवार की रात भोजन की तलाश में जंगल से भटकर गांव पहुंचे हाथियों के झुंड में से एक विशालकाय हाथी अंधेरे के कारण गहरे कुएं में गिर गया था, जिसके बाद शुरू हुआ जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष का वह सिलसिला, जो गुरुवार दोपहर को समाप्त हुआ।

घटना की जानकारी गुरुवार सुबह तब लगी जब ग्रामीणों ने कुएं के भीतर फंसे बेबस गजराज की चिंघाड़ सुनी। सूचना मिलते ही वन विभाग और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं और एक जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार की गई। हाथी को सुरक्षित निकालने के लिए मौके पर जेसीबी मशीन बुलाई गई, जिसके जरिए कुएं के एक बड़े हिस्से को तोड़कर एक ढलाननुमा रास्ता (रैंप) बनाया गया। बचाव दल ने हाथी को ऊपर उठाने के लिए कुएं में पानी भरने की रणनीति भी अपनाई, ताकि उछाल के बल से हाथी को ऊपर आने में मदद मिल सके। करीब दस फीट तक की खुदाई और घंटों के अथक परिश्रम के बाद आखिरकार गजराज कुएं की कैद से आजाद होने में सफल रहे।

हालांकि, आजादी मिलते ही हाथी का व्यवहार अत्यंत आक्रामक हो गया। कुएं से बाहर निकलते ही उसने बचाव कार्य में जुटी उसी जेसीबी मशीन पर हमला कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया, जिसने उसकी जान बचाई थी। इतना ही नहीं, जंगल की ओर भागते समय हाथी ने रास्ते में खड़ी सात मोटरसाइकिलों को कुचल दिया और कई घरों की दीवारों को भी नुकसान पहुंचाया। इस दौरान मची भगदड़ में तीन स्थानीय ग्रामीण घायल हुए हैं, जिन्हें तत्काल स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वन अधिकारियों के अनुसार, घंटों तक संकीर्ण स्थान में फंसे रहने के कारण हाथी अत्यधिक तनाव और दहशत में था, जिसके चलते उसने इस प्रकार की प्रतिक्रिया दी।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक भावनात्मक पहलू भी उभरकर सामने आया। जिस परिवार के आंगन में स्थित कुएं में यह हादसा हुआ, वहां शुक्रवार को विवाह समारोह आयोजित होना है। घर के सदस्यों ने इसे किसी अपशकुन के बजाय 'लक्ष्मी' के आगमन और दैवीय आशीर्वाद का संकेत माना है। फिलहाल, वन विभाग की टीम हाथी की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है ताकि वह दोबारा रिहायशी इलाकों का रुख न करे। यह घटना एक बार फिर इंसानों और जंगली जानवरों के बीच बढ़ते संघर्ष और प्राकृतिक आवासों की कमी की ओर ध्यान आकर्षित करती है, लेकिन अंततः एक बेजुबान की जान बचना ही इस चुनौतीपूर्ण दिन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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