2015-2025: भारत में उरैनीयम खानों का विस्तार, डेक्कन पठार में निवेश की जरूरत
अप्रैल 2015 से सितंबर 2025 तक भारत में उरैनीयम संसाधनों में 2,17,560 टन की वृद्धि, झारखंड, राजस्थान और कर्नाटक में नए खदानों की पहचान, जबकि मराठवाड़ा और डेक्कन पठार में नई खोज नहीं हुई।

भारत में उरैनीयम संसाधन
भारत में परमाणु ऊर्जा के लिए आवश्यक उरैनीयम संसाधनों में पिछले 10 वर्षों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टरेट फॉर एक्सप्लोरेशन एंड रिसर्च (AMD) द्वारा अप्रैल 2015 से सितंबर 2025 के बीच कुल 2,17,560 टन इन-सिटू यू-ऑक्साइड संसाधन बढ़ाए गए हैं। इस अवधि में नए उरैनीयम भंडारों की खोज ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत किया है।
जिन नए खानों की पहचान की गई, उनमें झारखंड में राजदह, कुदादा और जादुगुड़ा नॉर्थ-बागलासाई-मेचुआ; राजस्थान में जहाज और गेरेतियों की धानी; तथा कर्नाटक में कंचनकाय और हुल्कल प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों में संसाधनों का संवर्धन और नए खदानों की स्थापना से भारत की परमाणु ईंधन उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, डेक्कन पठार क्षेत्र, जिसमें महाराष्ट्र का मराठवाड़ा भी शामिल है, में नए उरैनीयम संसाधनों का संवर्धन या नई खोज अभी तक नहीं की गई है। यह तथ्य यह दर्शाता है कि इस क्षेत्र में अभी भी उरैनीयम संभावनाओं की खोज और विस्तारीकरण की संभावनाएँ मौजूद हैं।
AMD के अधिकारी बताते हैं कि इन संसाधनों की खोज और संवर्धन प्रक्रिया में भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, खनिज विश्लेषण और उन्नत तकनीकी सर्वेक्षण शामिल हैं। प्रत्येक नए खदान की पहचान, स्थिरता और पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन बेहद सावधानीपूर्वक किया जाता है। सरकार द्वारा यह कदम भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को आत्मनिर्भर बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
संसदीय प्रश्न के जवाब में यह जानकारी सामने आई है कि देश में उरैनीयम संसाधनों का विस्तार तेजी से हो रहा है, जबकि कुछ क्षेत्र अभी भी खोज और विकास के लिए खुला हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए खानों के विकास से न केवल ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
इस अवधि में हुई खोज और संवर्धन से यह स्पष्ट होता है कि भारत परमाणु ऊर्जा उत्पादन में निरंतर प्रगति कर रहा है। साथ ही, उरैनीयम के स्थायी और सुरक्षित उत्पादन के लिए तकनीकी और भौगोलिक चुनौतियों का सामना करते हुए सरकार ने एक व्यवस्थित योजना बनाई है।
भविष्य में डेक्कन पठार और मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में संभावित उरैनीयम भंडारों की खोज के लिए अनुसंधान और निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है। इस प्रकार की खोजें न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की रणनीतिक स्थिति को भी सुदृढ़ करेंगी।
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Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
